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Gorakhpur News: नियम की जानकारी न होने पर अटकी शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति

Sat, 13 Apr 2024 04:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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गोरखपुर। बैंक खाते के मामले में सही जानकारी के अभाव में सैकड़ों छात्र-छात्राओं के पढ़ाई पर संकट आ गया है। उनके ग्राहक सेवा केंद्र या जन धन खाते में लेने देन की सीमा 20 हजार रुपये से अधिक का भुगतान नहीं हुआ। उन्हें इस वर्ष छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने की संभावना बहुत कम है। सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के 6761 छात्र-छात्राओं के बैंक खाते में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं पहुंची है। कार्यालय में दस्तक देने वाले छात्र-छात्राओं के अनुसार अनुमान लगाया जा रहा है कि शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति नहीं पहुंचने में सबसे अधिक माइनर बैंक खाते वाले हैं।
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नियम के अनुसार ग्राहक सेवा केंद्र या जन धन योजना के अंतर्गत शून्य रकम पर खोले गए बैंक खाते माइनर होते हैं। इसमें एक बार में 20 हजार रुपये से अधिक रकम जमा नहीं होती है, जबकि इन खातों को खोलने के बाद ऑटोमेटिक आधार सीडिंग भी हो जाती है। जिनके एक से अधिक बैंक खाते हैं, उनके उसी खाते में रकम भेजी गई, जिस खाते में आधार सीडिंग है। यहीं कारण है कि काफी संख्या में छात्र-छात्राओं को उनके हक से वंचित होना पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि निदेशालय से सिर्फ यह रिपोर्ट मिली है कि कितने छात्र-छात्राओं के खाते में शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति भेजी गई है और कितने लोगों को के खाते में राशि नहीं भेजी गई है। छात्र-छात्राओं के स्टेटस में उन्हें पता चल रहा है कि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिलने का क्या कारण है। अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग कार्यालय में शुक्रवार पहुंचे विकास ने बताया कि उनके साथियों को 56 हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति मिली है, लेकिन उनके बैंक खाते में रकम नहीं आई। वहीं समाज कल्याण विभाग में चार छात्राएं भी यहीं शिकायत लेकर पहंची थी, लेकिन उन्हें लिपिक का जवाब सुनकर मायूस होना पड़ा।

छात्र-छात्राओं को नहीं कर पाए जागरूक
प्रोफेशनल कोर्स करने वाले छात्र-छात्राओं को जागरूकता के अभाव में नुकसान उठाना पड़ रहा है। समाज कल्याण विभाग एवं अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षण संस्थानों को दो बार जागरूक किया गया, लेकिन यह जानकारी छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंची। इस कारण काफी संख्या में छात्र-छात्राओं को मायूस होना पड़ा है। जिम्मेदारों का कहना है कि संबंधित विभाग और शिक्षण संस्थानों ने मीडिया और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया होता तो यह समस्या नहीं आती। बीएड, बीटीसी, एलएलबी, आईटीआई सहित अन्य डिप्लोमा कोर्स में दिक्कत आई है।
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ऐसा कर सकते हैं वंचित छात्र-छात्राएं
माइनर बैंक खाते वाले जिन छात्र-छात्राओं के बैंक खाते में शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति नहीं पहुंची है, उन्हें इंडिया पोस्ट बैंक व अन्य बैंक में नया खोता खुलवाना चाहिए। नए खाते में आधार सीडिंग हो जाएगी तो ट्रांजेंक्शन फेल होने जैसी समस्या नहीं आएगी। यदि शासन से निदेशालय को इन छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति, छात्रवृत्ति देने का आदेश आएगा तो ट्रांजेक्शन आसानी से हो जाएगा। ग्राहक सेवा केंद्र के खाते को बैंक शाखा में ट्रांसफर करने पर भी क्रेडिट लिमिट 50 हजार रुपये हो जाती है।

पढ़ाई में आ गया संकट
शहर में पादरी बाजार में शिवम मिश्रा ने बताया कि वे बीएड कर रहे हैं। उनके बैंक खाते में 36500 रुपये आना चाहिए था, लेकिन बैंक खाते में रकम नहीं आई है। उन्होंने योजना बनाई थी कि शुल्क प्रतिपूर्ति से अगले सत्र में राहत मिल जाएगी, लेकिन कार्यालय से बात करने पर पता चला कि शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति मिलने की उम्मीद कम है। अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में बुधवार को पहुंचे देवरिया के अमित गुप्ता ने बताया कि उनकी रिश्तेदार छात्रा को 1800 रुपये छात्रवृत्ति और 20 हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति उसके बैंक खाते में नहीं पहुंची है। समाज कल्याण में पहुंचे दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र अभिषेक कुमार एवं प्रवीण ने भी शिकायत की कि उनके खाते में छात्रवृत्ति नहीं आई है।


इस कारण भी अटकी छात्रवृत्ति
-आवेदन करते समय प्राप्तांक व पूर्णांक गलत भरना
-बीएड, बीटीसी, एलएलबी में सामान्य वर्ग में 55 प्रतिशत व अनसूचित वर्ग में 50 प्रतिशत से कम अंक
-हाईस्कूल में अन्य प्रदेश के बोर्ड से पढ़ाई करने के मामले में
-गैर पेशागत कोर्स में अनुसूचित वर्ग में 33 प्रतिशत व सामान्य वर्ग में 50 प्रतिशत से कम अंक

-सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग में दो लाख रुपये और अनुसूचित वर्ग में 2.5 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय

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कोट

निदेशालय से मिली रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है कि कितने छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति मिली है और कितने छात्र-छात्राओं को भुगतान नहीं हुआ है। इसमें माइनर बैंक खाते वाले केस भी हैं। इस मामले में निदेशालय को जानकारी दी गई है। निदेशालय को शासन से अनुमति मिली तो वंचित छात्रवृत्ति मिल सकती है।


वशिष्ट नारायण सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी

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अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति के लिए बजट की कमी नहीं थी। जिनके बैंक खाते में शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति नहीं पहुंची है, वे शिकायत कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में अब शासन और निदेशालय स्तर से निर्णय होना है। माइनर बैंक खाते के कारण सहित अन्य कारणों से ट्रांजेक्शन फेल हुए हैं।
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श्रद्धा मिश्रा, अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी

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