पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह अक्तूबर में जिले के दौरे पर आए थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि हर ब्लाक में अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाकर निराश्रित पशुओं को वहां पर पहुंचाया जाए। तब उन्होंने कहा कि था कि प्रदेश के अधिकतर निराश्रित पशुओं को गो आश्रय स्थल भेजा जा चुका है। लगभग दो लाख पशु प्रदेश में और होंगे जिन्हें हर हाल में 31 दिसम्बर तक गो आश्रय स्थल में भेजा जाएगा। इस अभियान में पूरा प्रशासनिक अमला से लेकर पुलिस महकमा भी लगेगा। उनके जाने के बाद एक बैठक भी हुई थी जिसमें सभी विभाग के अधिकारी शामिल हुए थे। 31 दिसम्बर बीतने के बाद जब सभी पशु नहीं पकड़े गए तो उसकी समय सीमा बढ़ाकर 16 जनवरी कर दी गई। इस बीच जिले के नोडल अधिकारी तीन दिन तक जिले का दौरा किए, लेकिन उनको कहीं पर छ्ट्टा पशु नहीं दिखाई दिए। जबकि जिले में अधिकतर गो आश्रय स्थलों का निर्माण हो चुका है। लेकिन, हकीकत इससे इतर है। आज भी किसान छुट्टा पशुओं से परेशान है। क्योंकि पशु उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
निराश्रित पशुओं को गो आश्रय स्थल पहुंचाने की समय सीमा पहले 31 दिसम्बर थी। गो आश्रय स्थल नहीं बन पाने के कारण समय सीमा बढ़ाकर 16 जनवरी की गई थी। अब उसकी सीमा बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी गई है। जी के सिंह मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पशुपालन