फरेंदा। गांधी आश्रम का बना तिरंगा पूरे देश में लहराता है। यहां के बने झंडे सहित अन्य उत्पादों की मांग भी पूरे देश में रहती है। गर्मी के साथ सर्दी के कपडे़, रोजमर्रा की वस्तुओं का उत्पादन भी यहां होता है। आश्रम से करीब 500 परिवारों का भरण पोषण भी होता है।
फरेंदा विकास खंड के मथुरानगर शनिचरी बाजार में करीब दो एकड़ में स्थित गांधी आश्रम बना है। यहां पर सभी उत्पादों का निर्माण होता है। यहां वर्ष 1950 से वस्त्र बनाने का कार्य शुरू हो गया था। उसके बाद 1982 में तत्कालीन मंत्री शिवकुमार पांडेय ने गोदाम का शिलान्यास किया था।
फरेंदा में कारखाना शुरू होने से करीब 500 परिवार की रोजी-रोटी चलती है। 500 करीगर सीजनल कार्य करते हैं। 25 कर्मचारी और 20 कारीगर पूरे साल आश्रम में कार्य करते रहते हैं। तिरंगा झंडे का निर्माण होने से लोग इसे सम्मान की नजर से देखते हैं। यहां के बने झंडे की सप्लाई केवल जिले ही नहीं देश भर में होती है।
अमृत महोत्सव के दौरान यहां के बने झंडे की मांग असम, गोवा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और जम्मू आदि राज्यों में जबरदस्त रही।
पिछले वर्ष अमृत महोत्सव मनाने के कारण 30 लाख रुपये की बिक्री हुई थी। फरेंदा गांधी आश्रम का कारोबार प्रति वर्ष 22 करोड़ से अधिक होता है। कश्मीर से कच्चा माल ऊन के बदले खादी वस्त्रों की सप्लाई की जाती है।
आश्रम में अगरबत्ती, बेसन, चने का सत्तू, सरसो का तेल, धोती, लुंगी, तौलिया, चादर, कंबल, रजाई व गद्दा सहित अनेक प्रकार के वस्त्र तैयार किए जाते हैं, जिसको गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर आदि जिलों में भेजा जाता है।