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फर्जी प्रवेश प्रकरण : ढाई साल में पहली कार्रवाई, लिपिक निलंबित- छात्र ने दर्ज कराया था धोखाधड़ी के केस

Tue, 15 Jul 2025 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

एमएमएमयूटी प्रशासन ने दिसंबर 2024 में लिपिक रवि मोहन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद जनवरी में नोटिस दिया था। लिपिक ने जवाब दिया लेकिन एमएमएमयूटी प्रशासन संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद अप्रैल में दूसरा और जून में तीसरा नोटिस दिया गया।
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एमएमएमयूटी( सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जाली दस्तावेज के जरिये फर्जी प्रवेश प्रकरण मामले में ढाई वर्ष बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहली कार्रवाई की है। दिसंबर 2024 में छात्र की तरफ से धोखाधड़ी का केस दर्ज कराए जाने व बीते अप्रैल में गिरफ्तारी के बाद से लिपिक रवि मोहन श्रीवास्तव के खिलाफ निलंबन की तलवार लटक रही थी।

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अब रवि मोहन को निलंबित कर दिया गया है। जनवरी 2023 में जाली दस्तावेज के जरिये 40 छात्रों के फर्जी प्रवेश का विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुलासा किया था।

एमएमएमयूटी प्रशासन ने दिसंबर 2024 में लिपिक रवि मोहन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद जनवरी में नोटिस दिया था। लिपिक ने जवाब दिया लेकिन एमएमएमयूटी प्रशासन संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद अप्रैल में दूसरा और जून में तीसरा नोटिस दिया गया।

छह महीने में जारी तीन नोटिस का भी संतोषजनक जवाब नहीं देने पर बीते 11 जुलाई को निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। रवि मोहन श्रीवास्तव को केमिकल इंजीनियरिंग विभाग से संबद्ध किया गया है।
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छात्र ने दर्ज कराया था धोखाधड़ी का केस
इस मामले में दिंसबर 2024 में शहर के एक छात्र ने कैंट थाने में केस दर्ज कराया था। उसने आरोप लगाया था कि लिपिक ने कर्मचारी कोटा से एडमिशन का झांसा देकर 2.70 लाख रुपये अपने खाते में मंगाए थे। बीटेक कंप्यूटर साइंस में प्रवेश मिल गया था।

यह है मामला
एमएमएमयूटी प्रशासन ने 10 जनवरी 2023 को खुलासा किया था कि 40 छात्र-छात्राओं ने जाली दस्तावेज के जरिये बीटेक में प्रवेश ले लिया था। इनमें सत्र 2020-21 के 22 और सत्र 2021-22 के 18 विद्यार्थी शामिल थे। उन सभी छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया था। तीन शिक्षक व पांच कर्मचारी जांच की जद में आए थे।

जांच में प्रथम दृष्टया इनमें से कुछ की संलिप्तता और कुछ की लापरवाही सामने आई थी। निष्कासित छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में ही लंबित है।

जांच में पैसे के लेन-देन की बात सामने आई थी। बार-बार नोटिस दिए जाने का भी लिपिक संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद उसे निलंबित किया गया है: प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी

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