- सेल्फ फाइनेंस की बजाय रेगुलर कोर्स के रूप में चलाने में आ रही अड़चनें
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स और बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स पाठ्यक्रम के संचालन के लिए कवायद शुरू हो गई है। अब तक विद्यार्थी बीए में इसे एक विषय के तौर पर लेते हैं और फिर इसमें एमए करते हैं, लेकिन विभिन्न संस्थानों में चयन के समय इसे प्राथमिकता नहीं दी जाती।
विश्वविद्यालय प्रशासन इसे नियमित पाठ्यक्रम के रूप में संचालित करना चाहता है, लेकिन नियमित पाठ्यक्रम के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। यदि सत्र 2024-25 में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के रूप में संचालन नहीं हुआ तो सत्र 2025-26 से रेगुलर कोर्स के रूप में संचालन की अनुमति शासन से मिल सकती है। विश्वविद्यालय में परास्नातक में भी एमए की बजाय एमएफए और एमपीए के संचालन की योजना है। देश के ज्यादातर विश्वविद्यालयों में फाइन एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स को प्रोफेशनल कोर्स का दर्जा दिया जा चुका है।
किसी शिक्षण संस्थान या विभिन्न एजेंसियों या एकेडमी में चयन के वक्त डिग्री की जांच होती है तो गोरखपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी इसी में छंट जाते हैं। दूसरे संस्थानों के विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री लगाते हैं तो डीडीयू वाले बीए और एमए की। यहां पर करीब एक दशक से प्रोफेशनल कोर्स को लेकर प्रयास होते रहे हैं लेकिन अलग-अलग कारणों से मामला अधर में अटका रहा।
वर्तमान में बीए के विद्यार्थी अन्य विषयों के साथ किसी एक विषय के रूप में ललितकला या संगीत पढ़ते हैं। प्रोफेशनल कोर्स होने पर यूजी में ही फाइन आर्ट्स और परफार्मिंग आर्ट्स के विषयों की अलग-अलग पढ़ाई हो सकेगी।
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कोट...
फाइन एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स के प्रोफेशनल कोर्स नहीं होने के कारण यहां के छात्रों के विभिन्न संस्थानों में चयन में मुश्किलें आती हैं। इसको लेकर कोशिश जारी है। नियमित पाठ्यक्रम के रूप में संचालन में कुछ अड़चनें हैं। इसे देखते हुए सेल्फ फाइनेंस कोर्स पर भी मंथन किया जा रहा है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय