फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: जायका लें पर बरतें सावधानी... अरहर दाल में खेसारी की मिलावट

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो-
विज्ञापन



छत्तीसगढ़ से आ रही है मिलावटी दाल, कम मिली होगी तो पहचान नहीं पाएंगे
मिलावटी दाल की बिक्री रोकने के लिए सतर्क हुए व्यापारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। आप जिसे अरहर दाल समझकर खा रहे हैं, उसमें खेसारी की मिलावट भी हो सकती है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से मिलावटी दाल यूपी में भी आ रही है। इसकी पहचान कर पाना बहुत मुश्किल है। खेसारी, सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है और इससे आंखों समेत सेहत से जुड़ीं कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अरहर दाल खरीदते समय सावधानी बरतें।
जानकारों के अनुसार, मिलों से निकली दालों का आकार एक बराबर होता है, जबकि खेसारी मिलाने पर फर्क पता चल सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा कम होगी तो पहचान पाना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि दाल को खरीदते समय से बारीकी से देखना चाहिए। हालांकि, मिलावटी दाल की बिक्री रोकने के लिए अब व्यापारी खुद सतर्क हो रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ धंधेबाजों की वजह से पूरे व्यापार को लोग शक की निगाह से देखने लगेंगे।
विज्ञापन

-
बीमारियों का गढ़ है खेसारी दाल
अरहर दाल में खेसारी दाल की मिलावट हो और इसका नियमित सेवन किया जाए तो कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इस कारण पैरालाइसिस अटैक हो सकता है। यह नर्व्स को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए आंखों की तकलीफ बढ़ सकती है। इससे पाचन तंत्र भी कमजोर होता है।
-डॉ. बीके सुमन, वरिष्ठ फिजिशियन

दो हजार रुपये क्विंटल के मुनाफे में मिलावटी दाल मंगाते हैं धंधेबाज
गोरखपुर। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आने वाली दाल में कुछ मिलर्स मिलावट कर रहे हैं। महेवा मंडी में रोजाना चार से पांच ट्रक दाल छत्तीसगढ़ से मंगाई जाती है। मिलावट वाली दाल में दो हजार रुपये क्विंटल का मुनाफा धंधेबाज कमाते हैं। मिलावटी दाल को भी शुद्ध दाल की कीमत पर बेच देते हैं। छत्तीसगढ़ दाल उद्योग संघ ने मामला पकड़े जाने के बाद खुद सतर्कता बरतते हुए पूरे देश के कारोबारियों को आगाह किया है। यहां भी दाल के कारोबारी मिलावटी दाल के धंधेबाजों से परेशान हैं।
व्यापारियों के अनुसार गोरखपुर में हर दिन 5 से 7 करोड़ रुपये का दाल का कारोबार होता है। मंडी में बाहर से 10-12 गाड़ी दाल आती है, जिसमें 4-5 गाड़़ी छत्तीसगढ़ से आती है। व्यापारियों के अनुसार कुछ धंधेबाज काली कमाई के लिए मिलावटी दाल का धंधा करते हैं। उन्हें यह दाल 20 रुपये किलो सस्ती मिल जाती है। एक ट्रक में 40-45 लाख रुपये की दाल लोड होती है। खेसारी दाल की कीमत 60 से 70 रुपये है। यह दाल बिहार में प्रतिबंधित नहीं है। वहां से आने वाली दालों में प्रतिबंधित दाल खेसारी, बटरी सहित अन्य दालों की मिलावट की आशंका जताई जा रही है। महेवा मंडी के सचिव राजित राम वर्मा ने बताया कि खेसारी दाल प्रतिबंधित है। इसकी निगरानी नियमित की जाती है।

-
छत्तीसगढ़ दाल उद्योग संघ ने खोला मोर्चा
छत्तीसगढ़ दाल उद्योग संघ ने मिलावटी दाल पर मोर्चा खोल दिया है। इससे सबक लेते हुए स्थानीय व्यापारी भी सतर्क हुए हैं। उद्योग संघ के अनुसार दाल में मिलावट होने की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी मिलर्स या ट्रेडर्स के वहां मिलावटी दाल पकड़ी जाती है तो उसके खिलाफ 2,50,000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा और मिलावटी दाल बेचने भी नहीं दिया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने बिलासपुर, रायपुर व भाटपारा में दालों की जांच के लिए अपनी टीम भी बनाई है।
व्यापारी बोले
छत्तीसगढ़ दाल उद्योग संघ दाल की मिलावट पर सख्त हुआ है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि गोरखपुर के व्यापारी मिलावटी दाल के धंधे में शामिल नहीं हैं। हालांकि, व्यापारियों को सचेत किया गया है कि मिलावटी दाल के मामले में विशेष ध्यान दें। यदि कोई व्यापारी दाल के मिलावट में पकड़ा जाएगा तो वह स्वयं जिम्मेदार होगा।
विज्ञापन

-संजय सिंघानिया, अध्यक्ष, महेवा गल्ला मंडी
वर्जन
दाल की नियमित जांच की जाती है। जब मिलावट की पुष्टि होती है तो कार्रवाई भी की जाती है। अरहर दाल के साथ ही चना, मसूर, मूंग सहित अन्य दालों का भी नमूना भी लिया जाता है। 2018-19 में गोरखपुर में खेसारी दाल पकड़ी गई थी। दाल की जांच जा रही है, मिलावट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
-कुमार गुंजन, सहायक खाद्य आयुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें