जीएसटी बिल में बड़े पैमाने पर हेराफेरी के मामले में पंजाब पुलिस ने रविवार को शहर में छापा मार कर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को हिरासत में लिया। आरोप है कि इंजीनियर ने फर्जी सॉफ्टवेयर तैयार कर जीएसटी और ई-वे बिलों में जालसाजी का पूरा सिस्टम खड़ा किया। इसके जरिये करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी हुई।
पंजाब के रूपनगर जिले के मंगल थाना में दर्ज प्राथमिकी के तहत कार्रवाई की गई। रविवार को पंजाब पुलिस की पांच सदस्यीय टीम गोरखपुर पहुंची और सबसे पहले रामगढ़ताल क्षेत्र में इंजीनियर के संभावित ठिकानों पर छापा मारा। घर पर न मिलने पर पुलिस ने उसके संपर्क और नेटवर्क की जांच शुरू की।
शाहपुर क्षेत्र से कुछ साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे इंजीनियर की लोकेशन का पता चला। देर शाम उसे हिरासत में ले लिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसे जल्द ही ट्रांजिट रिमांड पर पंजाब ले जाने की तैयारी है।
पुलिस ने बताया कि इंजीनियर ने ऐसा फर्जी सॉफ्टवेयर विकसित किया था जो आधिकारिक जीएसटी पोर्टल की कार्यप्रणाली की हूबहू नकल करता था। इसके जरिये फर्जी ई-वे बिल और जीएसटी इनवॉइस जेनरेट किए जाते थे, ताकि कागजों पर माल की आवाजाही दिखाई दे, जबकि वास्तविकता में कोई व्यापार नहीं होता था।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तहत करीब 127 तक फर्जी फर्में बनाई गई थीं। इन फर्मों का पंजीकरण कराने के लिए गरीब मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया। उन्हें प्रतिदिन दिहाड़ी का लालच देकर दस्तावेज हासिल किए गए।
फर्जीवाड़े में तकनीकी संचालन और साफ्टवेयर तैयार करने की अहम जिम्मेदारी गोरखपुर के तारामंडल क्षेत्र के विवेकपुरम निवासी इंजीनियर की बताई जा रही है। उसके पकड़े जाने के बाद पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं। पुलिस, फिलहाल पूरे मामले की जांच में लगी है और आगे की कार्रवाई की जानकारी जल्द दी जाएगी।
सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब पुलिस ने इंजीनियर को हिरासत में लिया है। वह उससे पूछताछ कर रही है।