जिले में 50 से अधिक शत्रु संपत्ति का अनुमान, अभी तक 16 की ही भेजी जाती रही है रिपोर्ट
नगर निकाय चुनाव समाप्त होने के बाद अब फिर सर्वे तेज करने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिले में शत्रु संपत्ति को लेकर नए सिरे से सर्वे किया जा रहा है। निकाय चुनाव की वजह से यह काम रुक गया था, मगर अब फिर इसे तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक जिले में 50 से अधिक शत्रु संपत्ति होने के अनुमान है। पांच साल पहले हुए सर्वे में ऐसी 16 संपत्तियां ही चिह्नित की गईं थीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शत्रु संपत्ति को लेकर जब सख्ती की तो प्रशासन ने ऐसी सभी संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है। ज्यादातर शत्रु संपत्तियां सदर तहसील क्षेत्र में हैं और इनमें आवासीय एवं वाणिज्यिक भवन शामिल किए गए हैं। इनमें भी वर्तमान में ज्यादातर पर कब्जा है। प्रशासन के मुताबिक सर्वे के बाद पहले खाली जमीन पर कब्जा किया जाएगा। जहां पक्के निर्माण हो गए हैं, उनके मामले में शासन से दिशा निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
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इसे कहते हैं शत्रु संपत्ति-
1962 एवं 1971 में भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए लोगों की यहां रह गई संपत्तियों को शत्रु संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया। उनके जाने के कुछ समय बाद से ही उनकी संपत्तियों पर नजदीकी लोगों का कब्जा हो गया। इन संपत्तियों पर वे अपना दावा करते हैं, लेकिन किसी के पास उपयुक्त दस्तावेज नहीं है। कुछ मामले कोर्ट में भी लंबित हैं।
2017 के सर्वे के अनुसार यहां हैं शत्रु संपत्तियां-
निजामपुर में 0.25 एकड़ में वाणिज्यिक भवन, सदर क्षेत्र में 0.32 एकड़ भूमि, सदर क्षेत्र में 0.75 एकड़ आवासीय भवन, इलाहीबाग क्षेत्र में 0.41 एकड़ आवासीय भवन, मोहद्दीपुर में 0.275 एकड़ वाणिज्यिक भवन, घासीकटरा में 0.73 एकड़ आवासीय भवन, घासीकटरा में आवासीय भवन, इलाहीबाग में 0.57 एकड़ आवासीय भवन, नयागांव में 0.32 एकड़ जमीन, तुर्कवलिया 1.822 एकड़ भूमि, पिपराइच 0.325 एकड़ आवासीय भवन, पिपराइच में 0.26 एकड़ आवासीय परिसर, पिपराइच में 1.22 एकड़ आवासीय परिसर, पिपराइच में 0.04 एकड़ आवासीय परिसर, बांसगांव में 0.72 एकड़ भूमि और करमहा बुजुर्ग में 9.7 एकड़ भूमि है।
कोट-
निकाय चुनाव की वजह से सर्वे का काम थोड़ा प्रभावित हो गया था। अब इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर जल्द ही शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। जिले में 50 से अधिक शत्रु संपत्ति के अनुमान है। पहले हुए सर्वे में 16 ही संपत्तियां सामने आईं थी। अब विस्तृत सर्वे कराकर ऐसी संपत्तियां चिह्नित की जा रही हैं।
- राजेश सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व