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Gorakhpur News: फर्जी आधार कार्ड बनाने में शिक्षा विभाग की आईडी हो रही इस्तेमाल

Wed, 28 Aug 2024 05:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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महराजगंज। फर्जी आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनाने के खेल में पुलिस कार्रवाई तो कर रही है लेकिन वह असली गुनहगारों तक नहीं पहुंच पा रही है या पहुंचना नहीं चाह रही है। इस खेल में अब तक जो भी आरोपी पकड़े गए हैं वह प्यादे भर हैं, उनके पीछे का मास्टरमाइंड कोई और है जो अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है। इस सारे खेल में कई ऐसे सवाल भी हैं जो अब तक अनुत्तरित हैं। उनका जवाब भी तभी मिलेगा जब पुलिस इस खेल के मास्टरमाइंड तक पहुंचेगी।
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23 अगस्त को निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के मुसहर बस्ती डोमा गांव में साइबर टीम ने छापा मारकर फर्जी आधार और जन्म प्रमाणपत्र बनाने का खेल उजागर किया था। पता चला कि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने में जिस लॉगिन-आईडी और अंगूठे का निशान का इस्तेमाल किया गया वह बीआरसी के एक शिक्षक की है। पुलिस ने प्रमाणपत्र बनाने वाले को तो पकड़ लिया लेकिन उसने यह जानने की कोशिश नहीं की कि शिक्षक की लॉगिन आईडी और अंगूठे का निशान उसके पास कहां से आया। साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि किसी की जानकारी के बगैर उसके अंगूठे का क्लोन बनाना संभव नहीं है। तो क्या इस गड़बड़झाले में शिक्षक भी शामिल है। इसका जवाब तो पुलिस की पूरी तफ्तीश में ही सामने आएगा।
जानकारी के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का आधार कार्ड सुधार करने और नया आधार कार्ड बनाने के लिए हर बीआरसी पर मशीन सहित उपकरण दिए गए हैं। मशीनों को संचालित करने के लिए चिह्नित जिम्मेदारों के नाम से आईडी भी जारी हुई है। इन मशीनों को संचालित करने के लिए चिह्नित व्यक्ति की आईडी और अंगूठे के निशान की जरूरत पड़ती है। इसके बगैर मशीन चालू ही नहीं होगी। विभागीय जानकारी के अनुसार, जिले में 12 बीआरसी पर बच्चों के प्रमाणपत्र से संबंधित समस्याओं को दूर किया जा रहा है। लेकिन साइबर टीम की कार्रवाई के बाद कुछ नए ही तथ्य सामने आए। आरोप है कि बीआरसी पर मशीनों को संचालित करने के चिन्हित कुछ व्यक्तियों ने अपनी लॉगिन आईडी किसी बाहरी ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों को दे दी है। पहले तो कहा गया कि उनकी आईडी हैक कर ली गई है, लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो सिर्फ लॉगिन आईडी से कुछ नहीं होगा। उस आईडी से मशीन शुरू करने के लिए अंगूठे के निशान की भी जरूरत होती है वह बिना किसी की जानकारी के फर्जी तरीके से नहीं बन सकता। यानी कुछ न कुछ तो मिलीभगत जरूर है।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता ने कहा कि फर्जी आधार बनाने के लिए शिक्षक की आईडी का गलत उपयोग करने की पुलिस से मौखिक जानकारी मिली है। फिलहाल अभी कोई लिखित में पत्र नहीं मिला है। अगर शिक्षक की मामले में संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिले के हर बीआरसी पर आधार कार्ड बनाने का आईडी कोड जारी किया गया है। इस आईडी से सरकारी स्कूलों में स्कूली बच्चों का आधार कार्ड बनाया जाता है। यदि जिम्मेदार द्वारा आईडी कोड का गलत उपयोग किया जा रहा है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।

नेपाली लोगों का भी बन जाता है आधार कार्ड
सूत्रों की माने तो आधार कार्ड बनाने और सुधार करने के लिए आम लोगों को तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर काटना पड़ रहा है। लोग कड़ी मशक्कत कर किसी तरह समस्याओं से उबर रहे हैं, लेकिन कुछ केंद्रों और ठिकानों पर फर्जी आधार कार्ड बनाया जा रहा है। जहां पर 400 से 500 रुपये देने के बाद भी आम लोगों का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है। वहीं नेपाली लोगों का बगैर कोई साक्ष्य के आसानी से आधार कार्ड बन जा रहा है।


साइबर टीम ने मामले का किया है खुलासा
साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक सजनू यादव ने बीते दिनों फर्जी आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र का खुलासा कर बताया है, कि आरोपी शख्स एक स्कूल के शिक्षक की आईडी और अंगूठे का रबर का कृत्रिम क्लोन बनाकर इस खेल को अंजाम दे रहा था। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के अंगूठा का क्लोन बगैर सहमति के नहीं बनाया जा सकता है। फिलहाल प्रथम दोषी वह है, जिसके पास से फर्जी आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले उपकरण बरामद हुए हैं। जांच के बाद इस खेल में कौन कौन शामिल है। सबका पता चल जाएगा।
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