डिजिटल युग में ई-रिसोर्स सूचनाओं का भंडार : प्रो संतोष डिवीएनपीजी में कार्यशाला का छठां दिन अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। ई-लर्निंग एक ऑनलाइन सेटिंग में एक शैक्षिक पाठ्यक्रम में संलग्न होने का कार्य है। ई-लर्निंग पाठ्यक्रम प्रौद्योगिकियों की एक श्रृंखला का उपयोग करके विभिन्न रूपों में मौजूद हो सकते हैं। ई-लर्निंग प्रौद्योगिकी और विशेष रूप से कंप्यूटर सिस्टम और शिक्षा के वातावरण में प्रौद्योगिकी के चल रहे समावेश से उपजा है। यह विचार महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार के प्रो संतोष कुमार त्रिपाठी ने ब्यक्त किया। वे जूम एप्प के माध्यम से कम्प्यूटर विज्ञान विभाग एवं आईक्यूएसी की ओर से आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला के छठवें दिन ’इम्पैक्ट ऑफ ई-लर्निंग एंड वर्चुअल क्लासरूम’ विषय पर अपना ब्याख्यान दे रहे थे। प्रो त्रिपाठी ने कहा कि डिजिटल युग में रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी कई गतिविधियों का रूप बदल गया है। शिक्षा भी इन्हीं में से है। ई-एजुकेशन की बदौलत अब यह कतई जरूरी नहीं रह गया कि पढ़ने और पढ़ाने वाला एक ही जगह आमने-सामने हो। इससे शिक्षा का प्रसार तो आसान हुआ ही है, रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होने स्पष्ट किया कि वर्चुअल क्लासरूम का कांसेप्ट भी नया है। आज चाहे बेसिक स्कूल कोर्स की स्टडी हो या सीए, एमबीए या फिर आईटी जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज अथवा डांस या म्यूजिक के कोर्सेज की, हर जगह ई-लर्निंग मेथड्स बहुपयोगी साबित हो रहे हैं। मार्केट में ऐसे पोर्टल्स की संख्या बढ़ गई है जो जेईई, एआईपीएमटी, बैंकिंग जैसे एंट्रेंस एग्जाम्स की तैयारी कराते हैं। इसी तरह यूनिवर्सिटीज अब मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) जैसे टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस की मदद ले रही हैं। इससे देश के किसी भी कोने में बैठे स्टूडेंट्स अपनी पसंद का ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। भारत में रहते हुए वे विदेशी यूनिवर्सिटीज से डिग्री हासिल कर सकते हैं। डॉ नितेश शुक्ला ने कार्यशाला के मुख्य वक्ता व ज़ूम एप,फेसबुक लाइव और यूट्यूब लाइव से जुड़े सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यशाला के कोऑर्डिनेटर डॉ पवन कुमार पांडेय ने कार्यक्रम का संचालन तथा डॉ संजय कुमार तिवारी आभार ज्ञापित किया। कार्यशाला में महाविद्यालय के शिक्षक सहित अन्य महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों से प्रतिभागियों ने भाग लिया।