चिड़ियाघर में 12 में से छह तेंदुए आदमखोर हैं। अब बाड़े में जिंदगी काटना इनकी मजबूरी है, क्योंकि माना जाता है कि एक बार आदमखोर हो चुके तेंदुए इंसानों के लिए हमेशा खतरा बने रहेंगे। मौका मिलते ही इंसानों पर फिर हमला बोल सकते हैं।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) के मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डाॅ. योगेश प्रताप सिंह बताते हैं कि भोजन न मिलने या किसी घटना की वजह से तेंदुए आदमखोर होते हैं। चिड़ियाघर में शांत होने के बाद भी इनको जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि एक बार यह इंसानों पर हमला कर चुके हैं।
अब इनके अंदर इंसानों से दूूरी बनाने की भावना और डर खत्म हो चुका है। जब भी मौका मिलेगा तो यह बेखौफ दोबारा भी हमलावर हो सकते हैं।
बिजनौर वाले आदमखोर तेंदुए के नीचे दांत टूटे हुए
चिड़ियाघर में इस समय कुल 12 तेंदुए हैं। इसमें तीन को दर्शकों के लिए मुख्य बाड़े में रखा गया है। छह तेंदुए आदमखोर हैं, जिन्हें रेस्क्यू सेंटर में कड़ी निगरानी में रखा गया है। छह आदमखोर तेंदुओं में चार मादा और दो नर हैं। इसमें पांच बिजनौर और एक बलरामपुर से आए हैं। ये तेंदुए शुरू से ही जंगल में रहे हैं, लेकिन इंसानों पर हमलावर होने की वजह से इनको रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया।
हाल ही में बिजनौर में तीन लोगों की जान लेने वाला तेंदुआ भी सेंटर में ही है, जो अब धीरे-धीरे शांत हो रहा है। इसके नीचे के दांत टूटे हुए हैं। माना जा रहा है कि हमले के दौरान ही चोट खाया होगा।
मांस और तालाब-क्रॉल में मस्ती से हो रहे शांत
आदमखोर तेंदुओं को खाने के लिए दिनभर में चार से पांच किलो मीट दिया जाता है। जंगल में यह खुले में घूमते हैं। ऐसे में यहां भी इनके लिए तालाब और क्रॉल की व्यवस्था की गई है। इसमें ये घूमते हैं और मस्ती कर सकते हैं। ऐसा इन्हें जंगल जैसा माहौल देने के लिए किया जा रहा है। इनके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है कि ये टहलते रहें। यहां धीरे-धीरे शांत हो रहे हैं।