कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत के मामले में लापरवाही बरतने का आरोपी प्राचार्य डॉ. संदीप घोष भी एम्स गोरखपुर का कार्यकारी निदेशक बनना चाहता था। एक अगस्त तक आवेदकों की लिस्ट में उसका 78वें नंबर पर नाम था।
अगस्त के प्रथम सप्ताह में दस्तावेजों के सत्यापन में 31 लोगों को बाहर कर दिया गया, जिसमें डॉ संदीप घोष का भी नाम था। हालांकि, एम्स के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। गोरखपुर एम्स के कार्यकारी निदेशक का पद पिछले साल डा. सुरेखा किशोर को हटाए जाने के बाद से ही रिक्त है।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डा. जीके पाॅल के पास यहां का अतिरिक्त चार्ज है। जनवरी 2024 में कार्यकारी निदेशक पद के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, जिसके लिए 81 लोगों ने आवेदन किये थे।
01 अगस्त को सभी 81 आवेदकों की सूची जारी हुई। इसमें 78 वें नंबर पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज कोलकाता के प्राचार्य डॉ. संदीप घोष का भी नाम था। इस मामले में एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ जीके पॉल से बात की गई लेकिन उन्होंने प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया।
नियमों में बदलाव से कई नाम बाहर
कार्यकारी निदेशक के लिए पीजी में 25 साल का अनुभव अनिवार्य किए जाने के बाद करीब 30 आवेदक बाहर हो गए। वहीं चर्चा है कि डॉ संदीप को कोलकाता कांड के बाद सूची से बाहर कर दिया गया। बाकी बच्चे 50 आवेदकों की काउंसलिंग 17 सितंबर से चल रही है, जो बृहस्पतिवार तक चलेगी। इसमें गोरखपुर एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ जीके पाॅल की पत्नी और जिपमर पुड्डुचेरी में कार्यरत डॉ पार्वती पाॅल, एम्स दिल्ली के डॉ पुनीत मिश्रा शामिल हैं।