दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में नए सत्र से संचालित होने वाले व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की सूची में डीफार्मा व बीफार्मा भी शामिल हो जाएंगे। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी ने प्रस्ताव तैयार करने की दिशा में कार्य करना भी शुरू कर दिया है। दोनों पाठ्यक्रम स्व वित्तपोषित मोड में संचालित होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में स्थान भी सुनिश्चित कर लिया गया है।
प्रस्ताव तैयार करने के लिए गठित कमेटी के नेतृत्वकर्ता और सदस्य विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग से हैं। प्रो. सोमशंकर के नेतृत्व के गठित कमेटी में विभाग के डाॅ. आलोक कुमार सिंह, डाॅ. सचिन कुमार सिंह और डाॅ. प्रीति गुप्ता को शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर भवन के प्रथम तल पर संचालित होगा।
डीफार्मा और बीफार्मा की दृष्टि से प्रयोगशाला विकसित करने के साथ ही पाठ्यक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। प्रवेश विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित परीक्षा के जरिये ही लिया जाएगा। नए सत्र में प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित करने की योजना विश्वविद्यालय प्रशासन ने बना ली है। प्रस्ताव तैयार होते ही उसे पहले विद्या परिषद और कार्य परिषद से पास कराया जाएगा, फिर पीएसआई यानी फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से पाठ्यक्रम के संचालन की अनुमति विश्वविद्यालय लेगा।
पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार करने में लेंगे विशेषज्ञों की सलाह
विश्वविद्यालय डीफार्मा व बीफार्मा पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार करने में देश भर के विषय विशेषज्ञों से सलाह लेगा, जिससे ऐसा पाठ्यक्रम तैयार हो सके, जिसे पढ़कर ऐसे विद्यार्थी तैयार हों, जिनकी उद्योग जगत में डिमांड हो। विषय विशेषज्ञों में फार्मेसी के वरिष्ठ शिक्षकों को तो स्थान दिया जाएगा, फार्मास्यूटिकल उद्योग से जुड़े लोगों को भी तवज्जो दी जाएगी। ऐसा करके अपने पाठ्यक्रम की व्यावसायिकता बढ़ाने की विश्वविद्यालय की योजना है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में डीफार्मा और बीफार्मा पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई गई है। प्रस्ताव तैयार करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। पूरी कोशिश है कि नए सत्र से इन दोनों पाठ्यक्रमों का संचालन विश्वविद्यालय परिसर में शुरू कर दिया जाए।