पूर्वांचल को नेपाल बार्डर और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से सीधे जोड़ने वाली गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य दो चरणों में होगा। पहले चरण का काम गोरखपुर कैंट से वाल्मीकिनगर (87 किमी) के बीच होगा। अंतरिम बजट में इसके लिए 310 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो चुके हैं। बुधवार को बिहार के बेतिया में प्रधानमंत्री इस कार्य के लिए आधारशिला रखेंगे। इसके बाद कार्य आरंभ हो जाएगा।
गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर रेल खंड गोरखपुर-छपरा, गोरखपुर-वाराणसी और गोरखपुर-लखनऊ से जुड़ा है। उत्तर भारत से पूर्वोत्तर भारत की तरफ जाने वाली अधिकांश ट्रेनें इस रूट से गुजरती हैं। पिछले साल ही इस रेल खंड के दोहरीकरण की मंजूरी मिली थी। तीन साल में काम पूरा करना है। इस पर कुल 1269.8 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
इस लाइन के दोहरीकरण से बिहार, झारखंड, अरुणाचल प्रांत आदि की तरफ से आने वाली ट्रेनों को लाइन क्लीयर मिलेगा, जिससे न सिर्फ ट्रेनों के संचालन समय में बचत होगी, बल्कि ट्रेनों की संख्या भी बढ़ जाएगी। इस लाइन के दोहरीकरण से सबसे अधिक फायदा गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर और बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले को होगा।
घुघली भी बनेगा जंक्शन
इस रेल खंड पर कुल 12 रेलवे स्टेशन हैं, जिसमें से गोरखपुर कैंट, उन्नौला, पिपराइच, बोदरवार, कप्तानगंज, घुघली, सिसवा बाजार, खड्डा, पनियहवा और वाल्मिकीनगर रोड क्राॅसिंग स्टेशन हैं।
घुघली स्टेशन से महराजगंज होते हुए आनंदनगर तक नई रेल लाइन बनाई जानी है। इस वजह से घुघली अब जंक्शन बन जाएगा। इसके अलावा महुअवा खुर्द व गुरली रामगढ़वा हाल्ट स्टेशन हैं। इन सभी स्टेशनों पर नए प्लेटफाॅर्म, फुट ओवरब्रिज, शेड आदि बनाए जाएंगे। इस परियोजना के लिए गंडक नदी पर 854 मीटर लंबा नया पुल बनेगा। इसके अलावा 16 बड़े एवं 38 छोटे पुल भी बनाए जाएंगे।