जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड का ऑपरेशन थिएटर तीन दिन से बंद है। सोमवार को भी सार्वजनिक अवकाश है। ऐसे में अब बड़े ऑपरेशन मंगलवार को ही होंगे। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज ऐसे हैं, जिनके परिजन निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए प्रयास कर रहे हैं।
आर्थो वार्ड के बगल में ऑपरेशन थिएटर है, जिसमें से एक में सामान्य और दूसरे में बड़े ऑपरेशन होते हैं। हर महीने यहां करीब डेढ़ सौ मरीजों का ऑपरेशन होता है। शुक्रवार से ही ऑपरेशन थिएटर बंद है। सोमवार को बकरीद के अवकाश के बाद इसे मंगलवार को खोला जाएगा।
आर्थो वार्ड में भर्ती एक मरीज की तीमारदार और गोरखनाथ क्षेत्र की रहने वाली विमलावती ने बताया कि पहले शनिवार को ऑपरेशन का डेट था, लेकिन डॉक्टर ने घाव अभी ताजा होने की बात कहकर मंगलवार को अगली डेट दी। हमने कर्मचारियों से पूछा तो बताया गया कि चार दिन के लिए ओटी बंद है। डॉक्टर साहब भी इमरजेंसी ड्यूटी में गए हैं।
वार्ड में ड्यूटी करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि हर महीने जब भी कोई वीवीआईपी क्षेत्र में आता है, तो सबसे पहले इस अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और सभी उपकरणों की साफ-सफाई कराकर उसे सील करा दिया जाता है।
वीवीआईपी के क्षेत्र से जाने के बाद ही ओटी को आम मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गोरखपुर अब पूर्वांचल का महत्वपूर्ण केंद्र है और महीने में दो से तीन बार किसी न किसी अति विशिष्ट व्यक्ति का आना-जाना होता ही रहता है, इसलिए ओटी को सील करना पड़ता है।
अतिरिक्त ड्यूटी लगाकर कराना पड़ता है ऑपरेशन
वीवीआईपी मूवमेंट खत्म होने तक ऑपरेशन वाले मरीजों की संख्या 20-22 तक पहुंच जाती है। इसके बाद डॉक्टर व अन्य स्टॉफ की संख्या बढ़ाकर प्रतीक्षारत मरीजों का प्राथमिकता के आधार पर उपचार कराया जाता है। जिन मरीजों की हालत अधिक गंभीर होती है, उनके परिजन उसे कहीं दूसरी जगह ले जाते हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ वीके सुमन ने बताया कि ऐसा शासन का आदेश है, कि जिले में जब भी किसी अतिविशिष्ट श्रेणी के मेहमान का आगमन होगा, जिनके लिए सेफ हाउस बनाना है तो सबसे पहले जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को इस काम में लाया जाता है।
अपने जिला अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर भी एक खास मेहमान के भ्रमण के कारण बंद कराया गया था, लेकिन इससे किसी गंभीर मरीज का ऑपरेशन प्रभावित नहीं हुआ है। मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है।