गोरखपुर। जिला सहकारी बैंक ने भी खाता और शेयरधारकों को मनमाने तरीके से लोन बांटे दिए। ये लोन करीब 15 वर्ष पूर्व दिए गए थे और रकम 60 करोड़ से ज्यादा की थी। जिसकी रिकवरी नहीं हुई और बैंक कंगाली के हालात पर पहुंच गया। आज भी करीब 35 करोड़ रुपये की रिकवरी नहीं हो पाई है। इसके लिए बैंक के अफसर पसीना बहा रहे हैं। हालात यह है कि खर्च कम करने के लिए शहर में दो ब्रांच बंद करके मेन ब्रांच में शिफ्ट कर दिए गए हैं, जबकि पुराने खाताधारकों के रुपये फंसे पड़े हैं। एक महीने में दो से चार हजार रुपये ही देने का नियम लागू किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, जिला सहकारी बैंक के गोरखपुर और महराजगंज का मुख्यालय यहां है। दोनों जिलों में करीब एक लाख से ज्यादा खाता और शेयरधारक हैं। वर्ष 2008 से 2010 तक करीब 60 करोड़ लोन दिए गए। इस रकम की रिकवरी नहीं हो सकी। बैंक घाटे में चला गया और बैंक कर्मियों को वेतन देने के रुपये नहीं बचे। जो रिकवरी होती रही उसी से वेतन दिया गया। साथ ही कुछ रुपये खाताधारकों को भी दिया गया, लेकिन इसके बाद हालात और खराब हो गए। शहर में ट्रांसपोर्टनगर और गोलघर शाखा को बंद करके मेन ब्रांच में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से खाताधारकों की ओर से रुपये जमा नहीं किए गए सिर्फ निकासी ही की गई। गोरखपुर और महराजगंज में अभी भी 35 करोड़ के लोन के फंसे हैं।