तंबाकू का सेवन खतरनाक हैं, यह जानते तो सब हैं, लेकिन बावजूद इसके लोग मानते नहीं हैं और मुंह के कैंसर के रोगी हो जाते हैं। जिले में लोग खैनी, गुटखा, सुर्ती, जर्दा, बीड़ी, हुक्का व सिगरेट के जरिए तंबाकू का सेवन करते हैं। इसके कारण मुंह के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सूबे के पूर्वी हिस्से में सर्वाधिक मुंह के कैंसर के मरीज सामने आते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज, एम्स और सिनर्जी कैंसर संस्थान में ओरल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा सर्जरी सिनर्जी में हो रही है। संस्थान के कैंसर सर्जन डॉ आलोक तिवारी ने बताया कि कैंसर सर्जरी में हर तीसरा मरीज मुंह के कैंसर का ही होता है। खास बात यह है कि पूर्वी यूपी कैंसर के 25 फीसदी मरीज ओरल कैंसर के होते हैं। उन्होंने लोगों से तंबाकू सेवन न करने की अपील की।
अवसाद या एकांत में रहने वाले मरीज भी तंबाकू की लत के शिकार हो जा रहे हैं। मनोचिकित्सक के पास इलाज कराने वाले मरीज भी इस लत को नहीं छोड़ पा रहे हैं। इसके कारण डॉक्टरों को दवाओं की डोज बदलनी पड़ रही है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के प्रो आमिल हयात खान ने बताया कि अवसाद, अकेलापन या सिजोफ्रेनिया के मरीजों में तंबाकू की लत अधिक देखने को मिलती है। यह अपने मन की भावनाएं दूसरे से व्यक्त नहीं कर पाते। ज्यादातर एकांत में रहते हैं। इस दौरान वह तंबाकू का सेवन करने लगते हैं। धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ने लगती है। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान भी वह इस नशे से दूर नहीं हो पा रहे हैं।