गोरखपुर। एक्सपायरी नमकीन और खराब पराठे के मामले सामने आने के बाद एम्स प्रशासन ने परिसर में कैंटीन चलाने वाले पुष्पा फूड एंड बेकर्स को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। वहीं कैंटीन संचालक ने भी एम्स परिसर पहुंचकर रिकाॅर्ड एकत्रित किया है। संचालक ने खाद्य सुरक्षा विभाग के दफ्तर भी पहुंचकर पक्ष रखा है। हालांकि, कैंटीन खोलने के मामले में अभी निर्णय नहीं हो पाया है।
एम्स परिसर में जुलाई में पुष्पा फूड एंड बेकर्स को तीन कैंटीन व दो आउटलेट संचालित करने का टेंडर मिला था। अयोध्या मेडिकल कॉलेज समेत कई अन्य जगहों पर कैंटीन चलाने वाली इस कंपनी ने एम्स परिसर स्थित मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और ऑडिटोरियम में अपना एक-एक कैंटीन खोला। इसके अलावा गेट व महिला हाॅस्टल के सामने एक-एक आउटलेट खोला गया।
छात्र-छात्राओं ने यहां मिलने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए तो इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई। इस बीच कैंटीन में खराब पराठा और एक्सपायरी डेट की अन्य खाद्य सामग्रियां मिलने का मामला एम्स प्रेसिडेंट देश दीपक वर्मा को हुई तो उन्होंने डीएम से बात कर कैंटीन की जांच कराने का आग्रह किया। बृहस्पतिवार को डीएम के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एम्स पहुंचकर कैंटीन से सैंपल लिए थे।
वर्जन
कैंटीन संचालक को नोटिस भेजकर जवाब मांगने का निर्देश दिया गया है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में अन्य कार्रवाई शुरू की जाएगी। कैंटीन का संचालन जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
देशदीपक वर्मा, प्रेसीडेंट, एम्स गोरखपुर
कैंटीन-मेस की जांच के लिए बनेगी फूड हाइजीन कमेटी
गोरखपुर। एम्स प्रशासन ने कैंटीन और मेस में स्वच्छता की निगरानी के लिए एक कमेटी गठित करने का फैसला किया है। इस कमेटी में एम्स के माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री विभाग के शिक्षक शामिल होंगे। इसके अलावा बाहरी सदस्य के तौर पर डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग से भी एक शिक्षक को इसमें शामिल किया जाएगा। यह टीम समय-समय पर परिसर में चलने वाली कैंटीन की जांच करेगी। वहां स्वच्छता के मानकों की पड़ताल करेगी। यह जानकारी एम्स उपनिदेशक प्रशासन अरुण सिंह और मीडिया प्रभारी डॉ अरुप मोहंती ने दी।
एम्स प्रशासन के अनुरोध पर बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम भेजकर जांच कराई थी। जिला प्रशासन की टीम ने जांच कर तीन जगह से नमूने लिए थे। इसके बाद एम्स के मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और सेमिनार हॉल में चलने वाले तीन कैंटीन व इससे जुड़े दो आउटलेट बंद कर दिए गए। इसके बाद शुक्रवार को एम्स प्रशासन ने इस पर सफाई दी।
डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि एम्स इस मामले को लेकर गंभीर है और नियमित निगरानी के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। लाइसेंस समेत अन्य सभी प्रक्रिया कैंटीन संचालक को पूरा करना था। ब्यूरो