गोरखपुर। अगले चार महीने तक शहर में डेंगू का लार्वा तलाशने के लिए 30 टीमें सक्रिय की जाएंगी। इस टीम में युवाओं को मानदेय पर रखा जाएगा। इनकी निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग की छह टीमें लगाईं जाएंगी। 16 अगस्त से इन टीमों को सक्रिय करने की तैयारी है।
अगस्त-सितंबर में बारिश के दौरान जलभराव होने पर मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। छत या अन्य जगहों पर रखे टूटे बर्तन, टायर आदि में पानी जमा होने पर डेंगू के लारवा पैदा हो जाते हैं। इसके अलावा जेई-एईएस के लिए भी यह मौसम खतरनाक माना जाता है। त्योहार शुरू होने पर दिल्ली-मुंबई से लोग डेंगू या मच्छर जनित अन्य बीमारियों के साथ लौटते हैं। इसलिए अगस्त से लेकर नवंबर तक का चार महीना गोरखपुर संक्रामक बीमारियाें के लिहाज से संवेदनशील हो जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि इस बार शहर में घर-घर जाकर सर्वे के लिए 30 टीमें गठित करने का प्रस्ताव है। इसमें शहर के युवाओं को मौका दिया जाएगा। इससे सर्वे में आसानी होगी। यह टीमें नवंबर तक सक्रिय रहेंगी। इनकी निगरानी के लिए छह टीमें गठित की जाएंगी।
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अब तक मिल चुके हैं डेंगू के तीन मरीज
इस साल अब तक डेंगू के तीन मरीज मिल चुके हैं। इलाज के बाद तीनों स्वस्थ हो गए हैं। संक्रमित लोगों के घर के नमूनों की जांच की गई है। जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार जुलाई में संचारी रोग अभियान के दौरान जिले में 4100 टीमों को फिल्ड में उतारा गया था। इन टीमों ने हर गांव व मुहल्ले में जाकर लोगों को संक्रामक बीमारियों से बचाव के उपाय बताए। जहां पानी जमा था, वहां एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया गया था।
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कोट
स्वास्थ्य विभाग 16 अगस्त से फिर वृहद अभियान चलाएगा। इस दौरान डेंगू के लार्वा की तलाश होगी। यदि किसी घर में लार्वा पाए जाते हैं और वहां पहले भी ऐसा हो चुका है तो उन मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। जिन घरों में पहली बार लार्वा मिलेगा, उन्हें चेतावनी देकर छोड़ने का नियम है।
-डॉ. आशुतोष दूबे, सीएमओ