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Gorakhpur News: विद्यार्थियों के शोध को पेटेंट कराएगा डीडीयू

Tue, 06 Feb 2024 06:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर

सार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय विद्यार्थियों द्वारा किए गए शोध को पेटेंट कराएगा। पेटेंट में आने वाला खर्च विश्वविद्यालय उठाएगा। वहीं, शोध का क्रेडिट विद्यार्थी, उसके निर्देशक और फैकल्टी को दिया जाएगा।
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विस्तार
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 दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय विद्यार्थियों द्वारा किए गए शोध को पेटेंट कराएगा। पेटेंट में आने वाला खर्च विश्वविद्यालय उठाएगा। वहीं, शोध का क्रेडिट विद्यार्थी, उसके निर्देशक और फैकल्टी को दिया जाएगा। शोध को पेटेंट कराने के बाद विश्वविद्यालय उसे अपनी संपत्ति घोषित कराएगा। आईपीआर (इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट) नीति को कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने अपनी सहमति प्रदान कर दी है।
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आमतौर पर देखा जाता है कि विश्वविद्यालय में शोध तो होता है लेकिन उसे पेटेंट कराने के लिए छात्र और शिक्षक गंभीरता नहीं दिखाते हैं। इसके पीछे का कारण भाग दौड़ और मोटी रकम के खर्च को माना जा रहा है। एक शोध को पेटेंट कराने में करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय ने शोध को पेटेंट कराने का निर्णय लिया है।
इस काम के लिए विद्या परिषद और प्रबंध बोर्ड ने अनुमति दे दी है। विश्वविद्यालय शोध को पेटेंट कराने का खर्च स्वयं उठाएगा। शोध पत्र सौंपने के बाद विद्यार्थी एवं शिक्षक की जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी। विश्वविद्यालय पेटेंट के लिए जो भी आवश्यक कागजी कार्रवाई होगी उसे पूरा कराएगा। शोध काे पेटेंट विश्वविद्यालय के नाम से कराया जाएगा।
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शोध पेटेंट का रैंकिंग में मिलेगी मदद

एनआईआरएफ, नैक समेत अन्य विश्वस्तरीय रैंकिंग में शोध पेटेंट का काफी महत्व है। रैंकिंग के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा किया कितना शोध पेटेंट कराया गया है, इसका भी उल्लेख किया जाता है। शोध में विश्वविद्यालय के संसाधनों का तो उपयोग किया जाता है लेकिन उसे क्रेडिट नहीं मिलता है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय ने शोध को अपने नाम से पेटेंट कराने का निर्णय लिया है।

इन उद्देश्यों को पूरा करेगी आईपीआर नीति

यह आईपीआर नीति मानविकी, कानून, विज्ञान, वाणिज्य आदि से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचारों को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा किए गए नवाचारों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तैयार करने में मदद करेगी। यह आईपीआर नीति एक उपयुक्त संगठनात्मक संरचना और तंत्र विकसित करेगी जिसके माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों के आविष्कारों और नवाचारों को संरक्षित किया जा सके।

साथ ही इस नीति द्वारा गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में अद्वितीय वस्तुओं के जीआई पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जाएगी ताकि उचित मान्यता और लाभ प्राप्त किया जा सके। यह संशोधित आईपीआर नीति विश्वविद्यालय में कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमिनार, सम्मेलन और वार्ता आयोजित कर आईपीआर मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाएगी।


कुलपित प्रो पूनम टंडन ने बताया कि आईपीआर नीति मानविकी, कानून, विज्ञान, वाणिज्य आदि से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचारों को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा किए गए नवाचारों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तैयार करने में मदद करेगी। इसकी कार्य परिषद से अनुमति मिल गई है।
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