तीन वर्षों से परीक्षा के विभिन्न देयकों का नहीं हुआ भुगतान
स्ववित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षकों का है लाखों बकाया
हर दिन परीक्षा विभाग व वित्त विभाग के लगा रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। परीक्षाओं में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के विभिन्न देयकों का भुगतान नहीं हो रहा है। इसे लेकर स्ववित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षक लामबंद होने लगे हैं।
डीडीयू से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक हर दिन परीक्षा के विभिन्न मद के भुगतान की मांग को लेकर प्रशासनिक भवन का चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्राचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. कृष्ण मुरारी पाल ने डीडीयू प्रशासन को संबोधित पत्र लिखकर शिक्षकों की पीड़ा व्यक्त की है। आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार है, जब परीक्षा की आधी अवधि समाप्त होने के बाद भी परीक्षा केंद्रों को कंटीजेंसी तक नहीं दी गई। इससे पहले परीक्षा केंद्रों को प्रति छात्र 15 रुपये की दर से हर साल एडवांस भुगतान किया जाता था।
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इन मदों में तीन-तीन साल से बकाया
डॉ. केएम पाल ने बताया कि परीक्षा केंद्र द्वारा सभी उत्तरपुस्तिका खुद नोडल केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। डीडीयू के कार्य परिषद से स्वीकृत है कि परीक्षा केंद्रों को इस मद में 10 रुपये प्रति किमी की दर से भुगतान किया जाएगा, लेकिन वर्ष 2021 से ही यह बकाया है। ड्यूटी करने वाले कक्ष निरीक्षकों को भी तीन साल से भुगतान नहीं हुआ है। उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन मद का भी दो परीक्षा का पैसा बकाया है।
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पिछले वर्ष शिक्षकों ने शहर में मांगी थी भीख
पिछले वर्ष 30 अप्रैल को स्ववित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षकों ने इसी मुद्दे पर शहर की सड़कों पर भीख मांगी थी। शिक्षकों ने डीडीयू के मुख्य द्वार से लेकर गोलघर होते हुए गोरखनाथ तक भिक्षाटन कर अपना विरोध जताया था। यह मुद्दा गरमाने के बाद परीक्षा मूल्यांकन का भुगतान किया गया था।
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कोट
जल्द ही कंटीजेंसी का भुगतान कर दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चल रही है। ज्यादातर बकाया कई साल पुराने हैं। उन फाइलों का निस्तारण करने की भी प्रक्रिया चल रही है।
- प्रो. शांतनु रस्तोगी, कुलसचिव