गुआक्टा के अध्यक्ष व मंत्री ने कुलपति पर लगाए हैं कई गंभीर आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह पर गुआक्टा ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यापाल को संबोधित पत्रक भेज कर जांच की मांग की है। पत्रक में 12 बिंदूओं पर कुलाधिपति का ध्यान आकृष्ट करते हुए जांच की मांग की गई है।
गुआक्टा के अध्यक्ष प्रो. केडी तिवारी और मंत्री प्रो. धीरेंद्र सिंह ने कुलाधिपति को भेजे पत्रक में कुलपति पर निरंकुश होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके व्यवहार से विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्रों के स्वतंत्र चिंतन एवं सृजनात्मक पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। पत्रक के माध्यम से उनके पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में किए गए कार्यों की जांच की अद्यतन स्थिति जानने, कोविड काल में लाखों छात्रों से लिए गए परीक्षा शुल्क वसूलने, विश्वविद्यालय परिसर के हजारों हरे पेड़ों को कटवाने, कुलपति के कार्यकाल में एकत्रित क्रीड़ा शुल्क का उपयोग अतिरिक्त मद में करने, विश्वविद्यालय की विभिन्न कमेटियां का प्रभार दो-तीन प्रोफेसर को देकर अधिकांश कार्य कराए जाने, विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के छात्रों से माइनर इलेक्टिव कोर्स के नाम पर परीक्षा शुल्क के साथ 500 रुपये अतिरिक्त वसूलने, परीक्षा समिति की बैठक डेढ़ वर्ष से नहीं कराने, राज्य सरकार के स्पष्ट आदेश के वावजूद प्रोन्नति के लिए विषय विशेषज्ञ देने में जानबूझकर विलंब करने, महाविद्यालय के अध्यापकों से प्रोन्नति के लिए दिये जाने वाले कक्ष का शुल्क 2000 से बढ़ाकर 7000 कर देने, शोध पात्रता परीक्षा में यूजीसी एवं राज्य सरकार के नियमानुसार विभागवार रिक्तियां नहीं बताने, विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में हुई खरीदारी आदि की जांच कराने की मांग की है।
विद्या परिषद व कार्यपरिषद की बैठक को बताया असंवैधानिक
गुआक्टा ने पत्रक के माध्यम से कुलाधिपति को बताया है कि कुलपति विश्वविद्यालय को किसी नियामक संस्था के नियमानुसार नहीं चला रहे हैं। विद्यापरिषद और कार्यपरिषद की बैठक मनमाने तरीके से कर रहे हैं। 24 जून को होनी वाली विद्या परिषद व कार्य परिषद की बैठक असंवैधानिक और नियम विरुद्ध है। आरोप है कि कुलपति ने प्रशासनिक भवन को जेल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। छात्रों और शिक्षकों को अनुशासनहीनता की नोटिस दी जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन में कुलपति कभी बैठते ही नहीं है।