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Gorakhpur News: दो महीने में डीडीयू ने दाखिल किए 10 पेटेंट

Wed, 15 May 2024 02:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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- छह महीने में 50 पेटेंट दाखिल करने का विश्वविद्यालय ने रखा है लक्ष्य
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- पेटेंट के लिए आर्थिक मदद दे रहा विश्वविद्यालय

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। आईपीआर नीति में बदलाव के बाद दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने दो महीने में कुल 10 पेटेंट दाखिल किए हैं। अब पेटेंट का खर्च विश्वविद्यालय दे रहा है इसकी वजह से इसकी संख्या में इजाफा हो रहा है। विश्वविद्यालय ने अगले छह महीने में 50 पेटेंट का लक्ष्य निर्धारित किया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय की रैंकिंग बढ़ाने के लिए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने शिक्षकों और शोधकर्ताओं को उनके चल रहे शोध से आईपीआर अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। विश्वविद्यालय में आईपीआर नीति को छात्र और शिक्षक-केंद्रित बनाया गया है और विश्वविद्यालय सभी आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। विश्वविद्यालय ने रैंकिंग में बेहतर शोधकर्ताओं को विश्वविद्यालय के नाम पर पेटेंट दाखिल करना अनिवार्य कर दिया है। पेटेंट दाखिल करने वालों में जैव प्रौद्योगिकी विभाग से प्रो. दिनेश यादव व प्रो. राजर्षि गौर की टीम, वनस्पति विज्ञान विभाग से प्रो. पूजा सिंह की टीम और डॉ. मनिंद्र कुमार, डॉ. प्रशांत शाही की टीम शामिल है।
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प्राइवेट कंसल्टेंसी का मिला फायदा
विश्वविद्यालय के अनुसंधान और विकास सेल तथा आईपीआर सेल ने सैन शैडो कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। उसके बाद सैन शैडो कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड की विशेषज्ञों की टीम ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों से बातचीत की, जिसके परिणामस्वरूप पेटेंट के लिए 30 से अधिक प्रारंभिक विचारों और काॅपीराइट के लिए लगभग 16 प्रारंभिक विचारों का संकलन हुआ। इसी के चलते दो महीने में गोरखपुर विश्वविद्यालय के नाम पर 10 पेटेंट दाखिल किए जा सके हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, भौगोलिक संकेत, ट्रेडमार्क और व्यापार रहस्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के आवश्यक संकेतक हैं और किसी भी संस्थान के रैंकिंग मापदंडों के अभिन्न अंग बन गए हैं।
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कोट....
आईपीआर नीति में सुधार के बाद बदलाव दिखने लगा है। दो माह में विश्वविद्यालय के नाम से 10 पेटेंट दाखिल हो चुके हैं। अब इसे छह महीने में 50 तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए सभी शिक्षक और शोधार्थी कार्य कर रहे हैं।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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