नाइन सेनेटरी नैपकिन के मालिक अमर तुलस्यान के नाम पर बीते दिनों 2.70 करोड़ की ठगी के बाद सोमवार को जालसाजों ने फिर ऐसा ही करने की कोशिश की। जिस नंबर से पिछली बार मैसेज कर ठगी की गई थी, उससे ही व्हाट्सएप मैसेज कर कंपनी के जीएम रमेश कुमार से रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
मैसेज देख जीएम ने तत्काल साइबर थाने में सूचना दी। पुलिस इस मामले में लखीमपुर खीरी में मदरसे में पढ़ने वाले एक युवक की तलाश कर रही है। जीएम रमेश ने पुलिस को बताया कि अमर तुलस्यान की डीपी लगाकर मैसेज आया-ऑफिस पहुंच गए हो। अभी एक क्लाइंट का खाता नंबर भेज रहा हूं। उसपर रुपये ट्रांसफर कर देना।
पहली बार जब ठगी हुई तो पुलिस ने व्हाट्सएप नंबर की जांच की। पता चला कि सिम लखीमपुर खीरी जिले के एक युवक के नाम पर है। पुलिस उसके घर पहुंची तो परिजनों ने बताया कि 20 वर्षीय युवक एक मदरसे में पढ़ता है। इस समय बाहर गया है। वह घर आएगा तो परिजन उसे लेकर पुलिस के पास आएंगे।
जांच में नंबर का आईपी एड्रेस कंबोडिया का मिला है। ऐसा माना जा रहा है कि जालसाजों ने लखीमपुर खीरी के युवक का नंबर इस्तेमाल कर जालसाजी की घटना को अंजाम दिया है।
हैदराबाद भी गई है पुलिस की एक टीम
उद्योगपति के नाम पर कंपनी के जीएम से 2.70 करोड़ रुपये की ठगी की रकम हैदराबाद के दो बैंक खाते में मंगाई गई थी। हैदराबाद में स्थित यस बैंक में 13 नवंबर को 90 लाख और 14 नवंबर को आईसीआईसीआई बैंक में 1.80 करोड़ रुपये मंगाए गए।
इसकी जांच पड़ताल करने पुलिस की एक टीम हैदराबाद गई है। दोनों बैंकों में रुपये जाने के बाद तत्काल उसे पश्चिम बंगाल, झारखंड और राजस्थान के 10 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था।
दो दिन में इस तरह हुई थी जालसाजी
जीएम रमेश कुमार ने बताया कि 13 नवंबर को उनके व्हाट्सएप पर निदेशक अमर तुलस्यान का फोटो लगा हुआ मैसेज आया। इसमें लिखा था कि उनका यह नंबर नंबर सेव कर ले। उस नंबर को सेव कर लिया। इसके बाद चैटिंग हुई, जिसमें लिखा गया कि वह एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हैं, इससे संबंधित कागजात आपको भेज देंगे।
यह बताने के बाद यस बैंक का खाता नंबर भेजा गया, जिसमें 90 लाख रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश आया। दूसरे दिन 14 नवंबर को भी उसी नंबर से एक और खाता नंबर भेजा गया, जिसमें 1.80 करोड़ रुपये भेजने का निर्देश मिला।
निर्देश का पालन करते हुए उन्होंने ऑफिस के कर्मचारी नागेंद्र शुक्ला से नेट बैंकिंग के जरिये रुपये ट्रांसफर करवाए। 14 नवंबर को निदेशक से बात हुई तो पता चला कि ऐसा कोई निर्देश उन्होंने नहीं दिया। इसके बाद साइबर अपराध थाने में केस दर्ज कराया गया।