गोरखपुर। संस्कृति, पहचान और अपनत्व व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। ये बातें दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहीं। वह मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित 14वें प्रो. एलबी त्रिपाठी स्मृति व्याख्यान व एक दिवसीय संगोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन कर रहे थे। ‘संस्कृति, पहचान और कल्याण : हाशिए के समुदायों के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य’ विषयक संगोष्ठी में बीएचयू के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश कुमार आर्य ने जनजातीय बच्चों की औपचारिक शिक्षा की चुनौतियों पर चर्चा की। दूसरे सत्र में बीएचयू के प्रो. तुषार सिंह ने कहा कि किसी संस्कृति में अनुकूलित हो जाना और उससे अपनत्व महसूस करना अलग-अलग बातें हैं। वहीं प्रो. संदीप कुमार व दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद प्रकाश ने भी अपनी बात रखी। विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया।