संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सदियों से मानवीय मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना एवं महान आदर्शों को प्राप्त करने के साथ ही आधुनिकता को अपनाने के लिए तत्पर रही है। तत्कालीन भारत में नालंदा एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा के प्रख्यात केंद्र हुआ करते थे, जहां विद्यार्थी ज्ञान प्राप्ति के साथ ही अपनी संस्कृति व मूल्यों से भी परिचित होता था।
उन्होंने दिग्विजयनाथ डिग्री कॉलेज में महंत दिग्विजयनाथ स्मृति व्याख्यानमाला के चतुर्थ दिवस पर विज्ञान संकाय के तत्वावधान में ’भारतीय ज्ञान परम्परा समावेशी, एकीकृत वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोविवि के भौतिकी विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी एक व्यक्ति द्वारा विकसित नही हैं बल्कि इसमें अनेकों मनीषियों का योगदान है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने की। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन डॉ. अनीता कुमारी ने एवं अतिथि परिचय व संचालन डॉ. नीतिश शुक्ला ने तथा आभार ज्ञापन प्रो. शशि प्रभा सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. धीरेंद्र सिंह, प्रो. परीक्षित सिंह, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, डॉ. सुभाष चन्द्र, डॉ. प्रतिमा सिंह, हिमांशु यादव, डॉ. पवन पांडेय मौजूद रहे।