गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया गया। रणथंभौर रिजर्व में 3 नए बाघ शावकों के जन्म होने की सुखद सूचना के साथ ‘फिल्म फॉर ह्यूमैनिटी’ श्रृंखला में रणथभौर में लापता बाघ की कहानी,‘लुकिंग फॉर सुलतान’ प्रदर्शित की गई। फिल्ममेकर पर्यावरणविद् माइक हरिगोविंद पांडेय की इस फिल्म ने संदेश दिया कि हमारी पारिस्थितिकी के प्रमुख आधार बाघ खाद्य शृंखला को रेगुलेट करते हैं। अपने भविष्य की पीढ़ी के लिए हम सब को मिल कर इनके संरक्षण के लिए मुखर होना होगा।
इस दौरान संरक्षण का संदेश देती रंगोली एवं फेस पेटिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें अपने चेहरे को बाघ के रंग में रंग कर बच्चों ने सबका ध्यान आकर्षित किया। सभी वन्यजीव प्रेमियों को बाघ के संरक्षण का संकल्प दिलाया। प्राणी उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह, रेंजर गौरव वर्मा, प्रभारी रेंजर रोहित सिंह, वरिष्ठ सहायक सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव, हेरिटेज फाउंडेशन के मनीष चौबे और पशु कल्याण कार्यकर्ता शिवेंद्र यादव की मौजूदगी में रिर्टन द टाइगर की पुस्तिका का भी विमोचन हुआ।
दुनिया में सर्वाधिक बाघ भारत में : डॉ योगेश
प्राणी उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस दिवस का मुख्य उद्देश्य बाघों की घटती हुई संख्या पर नियंत्रण करना है। हम सब खुशनसीब है कि प्राणी उद्यान में एक नर बाघ अमर एवं मादा बाघिन मैलानी एवं सफेद बाघिन गीता भी दीदार को उपलब्ध हैं। बताया कि भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ दुनिया भर में सर्वाधिक भारत में 70 फीसदी पाए जाते हैं, साल 2023 में 53 टाइगर रिजर्व में उनकी संख्या 3167 हो गई है।