अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के स्मार्ट वन स्कीम में रुपया जमा कराने का झांसा देकर रिटायर करने का 15 लाख रुपए हड़पने का मामला सामने आया। जालसाजी की जानकारी होने पर पीड़ित ने रुपए की मांग की तो आनाकानी करने लगा। कैंट पुलिस पीड़ित की तहरीर पर तीन जालसाजों के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, रामगढ़ताल इलाके के शिवाजीनगर सेक्टर 2 निवासी जयराम पूर्वोत्तर रेलवे में अक्टूबर 2019 में एमसीएम पद से रिटायर हैं। उन्होंने पुलिस को दिए तहरीर में बताया है कि लखनऊ के कृष्णानगर निवासी रणधीर त्रिपाठी, चिलुआताल के मोहरिपुर शेखपुरवा के अरविंद कुमार और नकहा के कन्हैयालाल अधिकारियों के पास अपने को एसबीआई लाइफ का कर्मचारी बताकर आते थे। वहीं उनसे उनकी मुलाकात हुई थी। रिटायर होने के बाद वह तीनों घर पहुंचे। वह एसबीआई लाइफ के स्मार्ट वन स्कीम में फायदा का झांसा देकर रकम जमा करने की बात कही। वह उनकी बातों में आ गए। 21 नवम्बर 2019 को चेक के जरिए 10 लाख और 5 दिसम्बर 2019 को 5 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर कर दिया। कुछ दिन बाद उनको वह 10 लाख रुपये का बांड दिए। पांच लाख का बांड बाद में देने की बात कही। इसपर उनकी नियत पर शक हुआ। वह बैंक जाकर पता किए तो मालूम चला कि एसबीआई लाइफ के स्मार्ट वन स्कीम में उनका कोई रकम जमा नहीं है। उनके द्वारा जो बांड दिया गया है वह भी फर्जी है। उन लोगों के बारे में पता करने पर मालूम चला कि उस नाम का कोई व्यक्ति काम नहीं करता है। उन लोगों के द्वारा स्मार्ट वन बिजनेस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की फार्म बनवा कर उस पर शार्ट में एसबीआई लिख कर भारतीय स्टेट बैंक का फर्जी कार्ड छपवाकर लोगों के साथ एसबीआई के नाम पर फ्राड किया जाता है। जब वह उनके पास रुपए मांगने पहुंचे तो वह आनाकानी करने लगे। कैंट थाना प्रभारी रवि राय ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।