पीपीगंज इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म कर उसे मां बनाने और फिर नवजात की निर्मम हत्या के मामले में एफ आईआर दर्ज हुए 12 दिन गुजर गए, लेकिन पुलिस गांव में घटना स्थल का मुआयना करने के अलावा कुछ नहीं कर सकी है। दूसरी तरफ जिले के एक जनप्रतिनिधि ने मामले की सूचना मुख्यमंत्री तक भेज दी है। जनप्रतिनिधि ने कहा है कि इस घटना में बार-बार भाजपा के किसी नेता का नाम आ रहा है। इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है।
जानकारी के मुताबिक पीपीगंज इलाके में 31 जनवरी को नवजात की हत्या कर फेंका गया शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद छह फरवरी को सीओ कैंपियरगंज दिनेश सिंह के आदेश पर थानेदार राजप्रकाश सिंह की तहरीर पर पीपीगंज पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कर ली। इसके बाद मामले की विवेचना कैंपियरगंज पुलिस के हवाले कर दी गई।
कैंपियरगंज थानेदार ने मौका मुआयना करने में तो तेजी दिखाई, लेकिन आज तक किसी का बयान दर्ज नहीं कर सके हैं। सीओ कैंपियरगंज बताते हैं कि पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह गांव में चौपाल लगाकर बयान दर्ज करे।
थाना प्रभारी कैंपियरगंज कहते हैं कि बयान देने के लिए कोई आगे ही नहीं आता है, जबकि गांव के विपिन सिंह ने खुद अमर उजाला से संपर्क कर बताया कि अगर पुलिस गांव में आएं तो कई लोग बयान देने के लिए तैयार हैं। व्यक्तिगत तौर पर कोई थाने पर जाकर बयान क्यों देगा? पुलिस इस मामले में कार्रवाई करना चाहे तो ग्रामीण साथ में हैं।
एक ठेकेदार ने पीड़िता के पिता के साथ की बातचीत
पीपीगंज के एक रेस्टोरेंट में प्रभावी ठेकेदार ने पीड़िता के पिता और भाई को बुलाकर बातचीत की। करीब एक घंटे की बातचीत के बाद बताया गया कि माननीय से बात हो गई है और इस मामले में पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करेगी। आप लोग परेशान न हों, मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा। अब सवाल उठता है कि माननीय कौन हैं, जो नवजात की हत्या और गांव से गायब नाबालिग मां की बरामदगी में रोड़ा डाल रहे हैं। पुलिस दबाव में क्यों है?