नाबालिक से दुष्कर्म व पैदाइश छुपाने के लिए नवजात की हत्या का आरोपी है विभाष्म सिंह। (file)
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पहले मौज-मस्ती, फिर गर्भधारण और अपराध छुपाने के लिए नवजात को मारकर फेंक देना। पीपीगंज में 31 जनवरी को मिली नवजात की हत्या के पीछे कुछ ऐसी ही कहानी है। नवजात की हत्या की पुष्टि पोस्टमार्टम से हो चुकी है। पुलिस ने नवजात के डीएनए टेस्ट के लिए नमूना ले लिया है। यही डीएनए टेस्ट नवजात के बेरहम मां-बाप को जेल भेजने का कारण बनेगा।
आरोपित विभाष्म सिंह और नाबालिग मां का बीते बुधवार को डीऑक्सी राइबो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) जांच के लिए ब्लड सैंपल लिया गया है। विभाष्म का ब्लड सैंपल जेल के अस्पताल में लिया गया तो नाबालिग मां का ब्लड सैंपल जिला महिला अस्पताल में लिया गया।
डीएनए फिंगर प्रिंटिंग टेस्ट की कुछ खासियतों के चलते यह टेस्ट आज तमाम आपराधियों को सजा दिलवाने में महत्वपूर्ण कारगर उपाय साबित हो रहा है। जुड़वा को छोड़कर हर व्यक्ति के डीएनए फिंगर प्रिंट अलग-अलग होते हैं।
कई सौ करोड़ व्यक्तियों में से किसी एक के ही डीएनए फिंगर प्रिंट एक जैसे होने की संभावना होती है। इसी खूबी के चलते घटनास्थल पर मिले सूक्ष्म से सूक्ष्म जैविक अंश (बाल, खून, लार, वीर्य, त्वचा आदि) से तैयार डीएनए फिंगर प्रिंट और संदिग्ध के डीएनए फिंगर प्रिंट के मिलान से यह साबित किया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति अपराध में शामिल था।
इस विधि को कानूनी मान्यता भी प्राप्त है। मातृत्त्व-पितृत्व विवाद में भी डीएनए टेस्ट के जरिए यह साबित किया जा सकता है कि कौन किसका बेटा है और कौन उसकी मां है। पीपीगंज में नवजात की हत्या के मामले में भी यह टेस्ट आसानी से साबित कर देगा कि उसे जन्म देने वाली कौन है और किसके संसर्ग से यह बच्चा जन्मा। यह तय होने के साथ ही नवजात के कत्ल के अपराधियों के चेहरों से भी नकाब हट जाएंगे। उनके बयान से इस जघन्य अपराध में शामिल अन्य लोग भी पुलिस की पकड़ में होगें।