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गोरखपुर दोहरे हत्याकांड में गगहा थाना इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड, एसएसपी ने की कार्रवाई

Mon, 24 Aug 2020 08:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • डीआईजी के आदेश पर एसएसपी ने की कार्रवाई, मारपीट के बाद भी मौके पर नहीं गए थे पुलिस कर्मी
  • गगहा के पोखरी गांव में पेड़ काटने के विवाद में हुई थी मां-बेटे की हत्या, राज प्रकाश नए थानेदार
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सस्पेंड
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विस्तार
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गोरखपुर में सगे भाइयों के बीच मारपीट की घटना के बाद भी मौके पर न जाने और मां-बेटे की हत्या में लापरवाही पर डीआईजी राजेश डी मोदक ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया और पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई का आदेश दिया। इसी का नतीजा रहा कि एसएसपी जोगिंदर कुमार ने गगहा थानेदार दिलीप कुमार सिंह, हल्का दरोगा कल्पनाथ सिंह व बीट आरक्षी हेड कांस्टेबल प्रमोद सिंह को निलंबित कर दिया।
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इन पुलिसकर्मियों पर घटना को गंभीरता से न लेने व कामकाज में लापरवाही बरतने के आरोप हैं। मारपीट के बाद पुलिस अगर कड़ी कार्रवाई करती तो शायद दोहरे हत्याकांड से बचा जा सकता था। फिलहाल, एसएसपी के पीआरओ रहे राज प्रकाश को गगहा का नया थानाध्यक्ष बनाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, गगहा थाना क्षेत्र के पोखरीगांव के दुबेपुरा टोला निवासी अरविंद दुबे की पत्नी हेमलता और बड़े बेटे हर्ष को अरविंद के सगे भाई राजेश दुबे के रिश्तेदारों ने गत रविवार को मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना से पहले महुआ के एक पेड़ को लेकर दोनों भाइयों में कहासुनी और मारपीट हुई थी।
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इसमें पांच लोग घायल हो गए थे। दोनों पक्षों ने थाने पर शिकायत की थी। एक-दूसरे के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए दोनों भाई थाने भी गए थे। पुलिस पर आरोप है कि गंभीर मामले में पुलिस ने एनसीआर तो दर्ज कर ली लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। मारपीट की घटना को भी गंभीरता से नहीं लिया। हाल यह रहा कि मारपीट की सूचना के बाद पुलिस मौके पर नहीं गई।

 
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अरविंद व छोटा बेटा घर होता तो हो सकती थी अनहोनी

अरविंद को घंटों थाने पर बैठाए रखा। अरविंद अपने छोटे बेटे उत्कर्ष के साथ थाने पर थे, उसी समय बड़े भाई राजेश की पत्नी ने मायके के लोगों को बुला लिया। बांसगांव थाना क्षेत्र के रहने वाले रिश्तेदार अन्य लोगों को लेकर गांव पहुंच गए। हथियारों से लैस राजेश के रिश्तेदारों ने इस बीच अरविंद के बड़े बेटे हर्ष को अकेला पाकर उसकी पिटाई शुरू कर दी।

बेटे को पिटता देख मां बचाने गई तो हमलावरों ने मां-बेटे की फावड़े से काट कर हत्या कर दी। एसएसपी की जांच में सामने आया कि अगर मारपीट की पहली घटना को ही गंभीरता से लिया गया होता और पुलिस मौके पर पहुंची होती तो हत्या वाली घटना शायद रोकी जा सकती थी। इस प्रकरण को गगहा इंस्पेक्टर, हल्का दरोगा या फिर बीट सिपाही किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया।

यही रिपोर्ट डीआईजी के पास गई। डीआईजी ने ही मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी का नतीजा रहा कि इंस्पेक्टर, दरोगा व बीट सिपाही को कर्तव्यों के प्रति बरती गई घोर लापरवाही, उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप का आरोप लगाकर निलंबित कर दिया गया।

आसपास के लोगों का कहना था कि राजेश के जिन रिश्तेदारों ने हमला बोला था, उन सबके सिर पर खून सवार था। सब मरने-मारने पर उतारू थे। यदि अरविंद व उनका छोटा बेटा उत्कर्ष मौके पर मिलते तो उनके साथ भी अनहोनी हो सकती थी।  
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