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बस्ती में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार ,1.81 लाख बरामद

Fri, 07 Feb 2020 07:05 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती।
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
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जिले के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) टीम ने कलवारी थाने की पुलिस के साथ छापा मारकर नकली नोट छापने व प्रसारित करने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को धर दबोचा। उनके पास से दो-दो सौ की हूबहू नई करेंसी जैसी एक लाख 81 हजार रुपये जाली नोट के रूप में पकड़ी गई।
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कलवारी-बस्ती रोड पर अक्सड़ा पुल के पास पांचों को गिरफ्तार कर उनमें से एक अभय के केंवचा गांव स्थित घर से नोट छापने के उपकरण व कागज बरामद किए गए। काफी मात्रा में अर्द्धनिर्मित नोट, नोट की साइज में कटे हुए कागज, पांच मोबाइल फोन आदि भी पुलिस को मिले हैं। गिरोह के सरगना गणेश मौर्य ने पुलिस को बताया कि अभय के घर नोट छापकर आंबेडकर नगर, आजमगढ़ समेत कई जिलों के खुदुरा बाजार में सप्लाई करते थे।

एसपी हेमराज मीना ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक पंकज के निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी कलवारी अनिल कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एसओजी प्रभारी अवधेश राज सिंह, कांस्टेबल आदित्य पांडेय, बुद्धेश कुमार, राम सुरेश यादव, दिलीप कुमार एवं अजय यादव के अलावा थानाध्यक्ष कलवारी संतोष कुमार सिंह की टीम ने मुखबिर की सूचना पर बृहस्पतिवार शाम पौने छह बजे अक्सड़ा पुल के पास दबिश दी। इस दौरान पांच संदिग्ध पकड़े गए। एसपी ने बरामद करने वाली टीम को 10 हजार रुपये पुरस्कार दिया है।
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बरामद हुए सामान

आरोपियों के कब्जे से एक लाख 81 हजार रुपये की जाली नोट बरामद की गई। 74 पेज अर्द्धनिर्मित नोट, छपे हुए कटे फटे 15 नोट, सफेद कागज 20 पेज, डाटा केबल, स्केल, कटर, लैपटॉप, प्रिंटर के साथ पांच मोबाइल फोन और एक बाइक भी बरामद की गई।

किसके पास कितने नोट मिले
- गणेश मौर्या निवासी महराजगंज जनपद आजमगढ़ के पास 55 हजार की जाली नोट
- अजय यादव निवासी मोतीपुर थाना कलवारी के पास से 45 हजार की नोट
- अमृत सेन व विजय प्रकाश निवासी मुसेपुर कला थाना हंसवर जनपद आंबेडकर नगर के पास के क्रमश: 30 व 25 हजार की जाली नोट
- अभय श्रीवास्तव निवासी केंवचा थाना कलवारी के पास 26 हजार दो सौ रुपये की नोट
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गूगल से सीखा नोट छापने का तरीका

नकली नोट छापकर रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करने वाले गैंग के आरोपी काफी खुराफाती दिमाग के हैं। मौज-मस्ती के लिए रुपयों की जरूरत पूरी करने को नकली नोट छापने की योजना बनाई। गूगल सर्च पर नकली नोट छापने की तकनीक सीखी। फिर अपने दोस्तों के साथ मिलकर अभय के घर पर छापना शुरू कर दिया। छपाई इतनी बेहतर है कि एक बारगी नोटों को देखकर पुलिस भी धोखा खा गई। सभी नोटों पर अंकित एक ही सीरियल नंबर ने संदेह पैदा कर दिया।
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