जमाना तेजी से बदल रहा है और होड़ की दौड़ के बीच रिश्ते-नातों का महत्व भी। बड़ों की लाख हिदायत पर भी कुछ बेटियां कई बार लापरवाही कर बैठती हैं। फिर दोस्तों के हाथों तबाह होने के बाद समझने को उनके पास कुछ रह नहीं जाता है। ऐसी पीड़ा बच्चियों की है। उनके परिजनों का जीवन भी बच्चियों की जरा सी नादानी के चलते नरक बन चुका है। परिजन कहते हैं कि बेटियां समझ नहीं पा रहीं कि उनके दोस्तों के बीच में दरिंदे भी हैं, इसलिए मां-बाप के रोकने-टोकने पर नाराज होने की नहीं, सावधानी बरतने की जरूरत है।
दोस्त के भरोसे ने नरक बना डाली जिंदगी
उसकी उम्र महज 19 साल है। बुलाने पर डरी-सहमी आई। छले जाने से चेहरा पीला पड़ गया है। बहुत कुरेदने पर इतना ही बोली- कौन सा दोस्त, दरिंदा कहिए। मेरी तो पूरी जिंदगी तबाह हो गई। दोस्त पर भरोसा किया। उससे मिलने गई। वहां उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर दरिंदगी की। उस वारदात के बाद से आज भी घरवालों से नजर नहीं मिला पाती हूं। घटना के बाद से ही सहेलियों और रिश्तेदारों ने भी मुंह फेर लिया है। सबका व्यवहार ऐसा बदल गया है कि अब जीने का मन ही नहीं करता..। बस इतने ही शब्द निकले थे कि पीड़िता की आंखों से आंसू टपकने लगे। इसी बीच उसके पिता आ गए और उसे अंदर लेकर जाने लगे। वह दहाड़े मारकर रोने लगी। कुछ देर बाद पिता बाहर निकले। कहा- अब रहने दीजिए। बड़ी मुश्किल से इलाज के बाद ठीक हुई है। कुछ दिन ननिहाल भी भेजा था, लेकिन वहां पर भी मन नहीं लगा तो घर ले आए। बेटी के साथ जो हुआ, वह सिर्फ उसकी पीड़ा नहीं, बल्कि पूरा परिवार उसे झेल रहा है। अब तो हालात ऐसे बदल गए है कि किसी से कहासुनी भी हो जाए तो पड़ोसी, बेटी पर लांछन लगा देते हैं।
तबाह हो चुकी बेटी से कहता हूं-रोए नहीं, डटकर लड़े
यह दर्द चिलुआताल इलाके की एक युवती का है। 14 मई की रात में एक बजे के करीब उसे दोस्त ने घर के बाहर मिलने के लिए बुलाया था। वह अपने दो दोस्त के साथ गांव के तालाब किनारे लेकर गया। फिर दो लोगों ने युवती के साथ दरिंदगी की। किसी तरह से दरिंदों के चंगुल से छूटकर आई युवती ने घरवालों को आपबीती बताई थी। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। पिता बताते हैं- दोस्ती की भनक तो थोड़ा पहले से ही थी। बेटी को समझाने की कोशिश भी की थी, लेकिन समझ में तब आया, जब उसका ही नहीं हमारा भी सबकुछ तबाह हो गया। आज जिंदगी का मकसद यही है कि आरोपियों को सजा मिले। इसके लिए बेटी को भी समझाता हूं कि वह पीछे न हटे और रोए नहीं, बल्कि डटकर लड़े।
शौक को समझने वाला दोस्त भी मिला, लेकिन सब बर्बाद हो गया
गीडा की यू-ट्यूबर सिसक रही थी। मोबाइल देखते ही उसे बंद करने की गुहार और फिर खुद के साथ हुई दरिंदगी की आपबीती बताने पर राजी हुई। उसने बताया, सब कुछ ठीक था, जिंदगी हंसी-खुशी चल रही थी। उसके रील्स बनाने के शौक को पूरा करने वाला एक साथी भी मिल गया। हम दोनों साथ ही रहते हैं। एक दूसरे को समझते हैं। जेल जा चुके प्रदुमन से कोई खास मुलाकात नहीं थी। राजघाट पर रील्स बनाते समय मिली जरूर थी। राजघाट पर जब उसने आकर ऑटो रोका और चालक से मारपीट करते हुए उसे जबरन उतारने लगा तो वह हैरान रह गई। बोली- यह क्या कर रहे हो। बोला कि कुछ नहीं, तुमसे मिलना है बस। फिर उसने जो किया, मत पूछिए। जिंदगी भर न भूलने वाली उस रात में जो हुआ, सब खत्म सा लगने लगा था। लेकिन उसी वक्त मैंने सोच लिया था, किसी को छोड़ूंगी नहीं। आज भी बोल रही हूं, सजा दिला के ही रहूंगी। युवती कहती है, जिंदगी में एक ही बात की तसल्ली है कि दोस्त इतना सब कुछ होने के बाद भी मुझे समझ रहा है, नहीं तो खुदकुशी के अलावा कुछ नहीं बचता। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेजा है, सजा दिलाने तक लडूंगी..।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
11 सितंबर 2022: रेलवे स्टेशन पर कूड़ा बीनने वली एक युवती से तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले में भी एक युवक से उसकी दोस्ती थी। उसके साथ वह प्लेटफार्म से दूर झाड़ी के पास बैठकर बातचीत कर रही थी कि उसके दो दोस्त और आ गए और सबने मिलकर दुष्कर्म किया था। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेजा था।
23 मई 2022: शहर के एक होटल में मुंहबोले भाई के बुलाने पर आई युवती को कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर सामूहिक दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आया था। पुलिस को बाद में जांच में पता चला था कि युवती को कमरे में उसका दोस्त ही लेकर गया था।
19 फरवरी 2020: रेलवे स्टेशन के एक होटल में वाराणसी से आए एक दवा कंपनी के एरिया मैनेजर ने अपने दोस्तों के साथ युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया था। युवती का एक एमआर से दोस्ती थी। वह नौकरी दिलाने का झांसा देकर होटल के कमरे में लाया था, फिर तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेजा था।