छत्तीसगढ़ में भी ठगी, कोर्ट के वारंट बी पर गोरखपुर कारागार लाया गया कमलेश
विभिन्न थानों में उसके खिलाफ दर्ज हैं 37 से अधिक मामले
सरकारी जमीनों को बेचकर कम ही दिनों में बन गया करोड़पति
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सरकारी जमीनों को बेचकर कम ही दिनों में करोड़पति बने भूमाफिया कमलेश यादव पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी उस पर ठगी के केस दर्ज हैं। कमलेश ने छत्तीसगढ़ में भी जमीन के नाम पर जालसाजी की है। छत्तीसगढ़ जेल में बंद कमलेश यादव को 10 दिन पहले यहां दर्ज 34 केस में कोर्ट की ओर से भेजे गए वारंट बी पर गोरखपुर कारागार लाया गया है, ताकि तेजी से ट्रायल कर उसे सजा दिलाई जा सके।
पुलिस की कार्रवाई में यह बात सामने आई थी कि कुशीनगर, देवरिया, बिहार और झारखंड के लोगों को सीलिंग की जमीन बेचकर कमलेश ने मोटी कमाई की है। इस कमाई से वह दो आईटीआई कॉलेज का मालिक बन बैठा। इसके अलावा बाराबंकी में भी एक होटल का निर्माण करवा रहा है। कई मामले सामने आने पर पुलिस ने कमलेश यादव और उसके साथी दीनानाथ पर 37 से अधिक केस विभिन्न थानों में दर्ज किए हैं। पुलिस ने बताया कि कमलेश का साथी दीनानाथ वर्तमान में जमानत पर बाहर है। उस पर नजर रखी जा रही है।
सौ करोड़ की संपत्ति हो चुकी जब्त
गैंगस्टर केस के तहत कमलेश और उसके साथी दीनानाथ की 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। कमलेश की सीलिंग की जमीन पर अवैध कमाई से बने कॉलेज को भी सीज किया जा चुका है। इसके अलावा दोनों के मोहद्दीपुर के मकान, जमीन पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
बाराबंकी के होटल पर पुलिस की नजर
बाराबंकी में बन रहे होटल पर कार्रवाई बाकी है। पुलिस के रिमांइडर पत्र से उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पर भी कार्रवाई हो जाएगी। उधर, कमलेश के भाई व परिजनों पर भी पुलिस की नजर है, ताकि वे बाराबंकी की संपत्ति बेचने न पाए। बताया जा रहा है कि बाराबंकी की संपत्ति में भाई का भी हिस्सा है।
चार नंबर बैरक में है कमलेश
पुलिस के अनुसार, कमलेश यादव को जेल के चार नंबर बैरक में रखा गया है। जहां पर उसकी हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही जेल में उससे मिलने आने वालों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
वर्जन-
कमलेश यादव के केस की कोर्ट में पैरवी तेज कराई जा रही है, ताकि उसे सजा मिल सके। कमलेश के बाराबंकी स्थित निर्माणाधीन होटल पर बहुत जल्द कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए बाराबंकी के डीएम को पत्र भेजा गया है।
- डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी