भरवल गांव के अंगद शाही की ऑटो पार्ट्स की दुकान है। फोरलेन में दुकान के साथ परिवार की करीब 24 डिसमिल जमीन भी चली गई। करीब डेढ़ करोड़ रुपये मुआवजे में मिले। कुछ पैसे जमीन के कारोबार में लगा दी। शानदार मकान बनाया और स्कॉर्पियो खरीद ली।
शानो-शौकत से रामदरश ने की बेटी की शादी
कौड़ीराम चौराहे से चार किलोमीटर आगे चवरिया खुर्द गांव हैं। गांव के रामदरश यादव के परिवार की नौ डिस्मिल जमीन फोरलेन निर्माण में अधिगृहित कर ली गई। बताया कि परिवार में तीन भाई हैं। करीब 50 से 55 लाख रुपये मुआवजे में मिला। रामदरश ने बेटी की शादी खूब शानो-शौकत से बढ़चढ़ कर की। गांव के लोग बताते हैं कि शादी पर करीब 25 लाख रुपये खर्च कर दिए।
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खूब मिला मुआवजा, गांवों में भी बढ़ा लक्जरी गाड़ियों का क्रेज
वर्ष 2016 में गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन के लिए जमीनें अधिगृहित की जाने लगीं। एनएचएआई ने जिले में 91 गांवों के किसानों की जमीनें अधिगृहित करके मुआवजे की रकम दी। किसानों को सबसे कम 10 लाख और अधिकतम चार करोड़ रुपये तक मुआवजा दिया गया। इसी प्रकार गोरखपुर सोनौली फोरलेन के लिए 66 गांवों में 200 एकड़ जमीन अधिगृहित की गई।
यहां भी किसानों को खूब मुआवजा मिला। जब रकम हाथ में आई तो ग्रामीणों में भी लग्जरी गाड़ियों का क्रेज बढ़ गया। अब गांव में भी घरों के बाहर थार, फॉच्यूर्नर, स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां देखने को मिल जाएंगी। जिले में इस समय प्रति वर्ष करीब 2.90 लाख चार पहिया गाड़ियां खरीदीं जा रहीं हैं, जिनमें 40 फीसदी खरीदार गांव के लोग हैं। वर्ष 2016 के पहले यह आंकड़ा डेढ़ लाख के आसपास था।
शहर के एक इलाके का घर। इन्होंने पिछले वर्ष ही अपने घर के बगल वाला दूसरा मकान भी खरीद लिया।
- फोटो : अमर उजाला।
जीएम महेंद्रा रवि शर्मा ने कहा कि शहर के बराबर ही अब गांवों में भी गाड़ियां जा रही हैं। हमारे यहां हर महीने करीब 50 से 60 गाड़ियां बिकती हैं, इसमें 30 से 35 गाड़ियां तो शहर से सटे इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में ही जाती हैं। यह देखकर लगता है कि अब गांवों के लोगों में भी लग्जरी गाड़ियों का शौक बढ़ा है।
बोले ग्रामीण
जमीन में ही निवेश किया
मलांव सेवक पांडेय शिवम नारायण ने कहा कि फोरलेन में जमीन चली गई। सरकार से मुआवजा मिला तो दूसरी जगह पर उससे अधिक जमीन खरीद ली है। जमीन रहेगी तो उसकी कीमत बढ़ती ही जाएगी। यही सोचकर निवेश कर दिया।
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मुआवजे की राशि को व्यापार में लगाया
कलानी बुजुर्ग पंकज ने कहा कि जब फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण हो रहा था तो उसमें पुश्तैनी जमीन चली गई। जो राशि मिली उससे खुद का व्यापार शुरू कर दिया है।
जमीन के बदले शहर में ली जमीन
कलानी बुजुर्ग प्रिंस त्रिपाठी ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के दौरान जो मुआवजा मिला उस पैसे को जमीन में ही लगा दिया। घर के सभी लोगों का मत था कि भौकाल में पैसे नहीं उड़ाने हैं। लिहाजा शहर में दो जगह जमीन खरीद ली।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि जमीन में पैसा लगाने वाले लोग पहले पूरी जांच पड़ताल कर लिया करें, ताकि उनका पैसा किसी विवाद में न फंसे। ये उनकी भी जिम्मेदारी होती है। जीडीए की आवासीय, कॉमर्शियल और अन्य निवेश के लिए लगातार योजनाएं आती हैं। यहां पैसे का निवेश सुरक्षित और उसका भविष्य उनके लिए ही हितकर होगा।