कलेक्ट्रेट भवन: अब 11 मंजिला नहीं छह-छह मंजिला के तीन टॉवर बनेंगे
- पहले 11 मंजिल में कराया जाना था निर्माण कार्य, अब छह मंजिल की होगी बिल्डिंग
- नए सिरे से प्रस्ताव पर डीपीआर तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। कलेक्ट्रेट की 100 वर्ष पुराने भवन को ध्वस्त करने के बाद अब नई बहुमंजिला इमारत बनाने की योजना में एक बार फिर बदलाव किया गया है। अब 11 मंजिला टॉवर बनाए जाने की बजाय ग्राउंड सहित छह-छह मंजिला के तीन टॉवर बनाए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग की ओर से अब नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
कलेक्ट्रेट परिसर में पुराने भवन को गिराकर बहुमंजिली भवन बनाने की योजना करीब तीन साल पहले बनी। मकसद था कि सचिवालय की तरह ही सभी ीसरकारी भवन एक ही जगह रहें ताकि लोगों को भटकना नहीं पड़े। इसके लिए करीब ढाई साल पूर्व भवन का डीपीआर तैयार हुआ। इसमें ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट के अलावा 11 मंजिला बिल्डिंग बनाने की योजना बनी। 356 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया। इसके हर फ्लोर को चार हजार स्कवायर मीटर में प्रस्तावित किया गया। 10 माह पूर्व पुरानी बिल्डिंग को तोड़ दिया गया। लेकिन भवन टूटने के बाद से अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो सका। पहले 11 मंजिल भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। फिर शासन के निर्देश के अनुसार दो टॉवर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। लेकिन, अब फिर फेरबदल हुआ है। निर्माण को लेकर नए सिरे से योजना तैयार हो रही है। इसमें ग्राउंड के अलावा छह- छह मंजिला तीन टॉवर बनाए जाएंगे। नए भवन पुलिस, प्रशासन के अलावा कई अन्य विभागों के दफ्तर भी शामिल रहेंगे। अगल-बगल भवन होने से लोगों का काम आसानी से हो सकेगा। इसमें हॉल, पार्किंग सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
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अलग अलग जगहों पर विभाग, होती परेशानी
कलेक्ट्रेट भवन टूटने के बाद यहां से डीएम कार्यालय को रेलवे बस स्टेशन के पास पर्यटन कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके अलावा एसएसपी ऑफिस को पुराना आरटीओ भवन में भेज दिया है। इससे कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों को अधिकारियों को मिलने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। डीएम के अलावा एसएसपी, एडीएम सिटी, एडीएम प्रशासन, तीन एसपी और अन्य अधिकारी बैठते थे। अगल-बगल में कई कार्यालय हाेने से फरियादियों को सहूलियत मिलती थी। यहां आने पर एक साथ लोग कई विभागों का कामकाज आसानी से निबटा लेते थे। बगल में तहसील, ट्रेजरी ऑफिस और रजिस्ट्री कार्यालय भी था। इससे लोगों का काम आसानी से हो जाता था। पुरानी जगह पर अब गाड़ियां खड़ी हो रही हैं।
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कलेक्ट्रेट के नए भवन का डीपीआर नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी कराकर काम कराया जाएगा।
अनिल कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्लयूडी