मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी लोगों को हरतालिका तीज के पावन पर्व की बधाई देते हुए कहा कि आज हम जटायु संरक्षण केंद्र के माध्यम से अपनी वैदिक और पौराणिक परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हैं। गिद्धराज जटायू धर्म और नई गरिमा की रक्षा के लिए रामायण काल के पहले बलिदानी थे।
जटायु के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए, रामायणकालीन उनकी स्मृतियों को बनाए रखने के लिए अयोध्या में राम मंदिर के सामने गिद्धराज जटायु की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है और अब यह जटायु संरक्षण केंद्र भी उसी की कड़ी है। जटायु संरक्षण केंद्र में कुल 6 राजगिद्धों (नर एवं मादा) को लाया जा चुका है।
यहां राजगिद्धों गिद्धों की निगरानी की सीसी कैमरों से की जाएगी। पांच हेक्टेयर जमीन पर बनाए गए इस केंद्र के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और प्रदेश सरकार के बीच में समझौता हुआ है। गोरखपुर वन प्रभाग द्वारा बनाई गई कार्ययोजना के अनुसार इस जटायु संरक्षण केंद्र से आगामी आठ-दस साल में 40 जोड़े राजगिद्ध छोड़े जाने का लक्ष्य है।
प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के प्रति संकल्पित है सरकार
सीएम योगी ने कहा कि सरकार प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए संकल्पित भाव से कम कर रही है। हमारे इन्हीं कार्यों की देन है कि आज उत्तर प्रदेश देश ही नहीं बल्कि दुनिया का ऐसा पहला राज्य है जिसने 7 वर्षों में 200 करोड़ के पौधारोपण के लक्ष्य को हासिल किया है। आज हम सभी क्लाइमेट चेंज के कारण और असमय बारिश, अतिवृष्टि तो कभी सूखे जैसी स्थितियों को देख रहे हैं।
जंगल ऑक्सीजन के केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जंगल ऑक्सीजन के केंद्र हैं। इनके माध्यम से क्लाइमेट चेंज की चुनौतियां से भी बचा जा सकता है। सरकार पर्यावरण संरक्षण के क्रम में जहां 100 वर्ष पुराने वृक्षों को हेरिटेज वृक्ष घोषित कर एक विस्तृत श्रृंखला खड़ी कर रही है तो वहीं वेटलैंड, पक्षी विहार, टाइगर रिजर्व भी बना रही है।
मैंने कहा कि प्रदेश में जंगलों के बढ़ने के साथ ही हरियाली का दायरा भी बड़ा है इससे जंगली जीवों को बचाने में भी कामयाबी मिली है। इसी के साथ नदियों का संरक्षण भी कर रही है। इन प्रयासों के चलते नदियों में अब जल की शुद्धता की प्रतीक डॉल्फिन भी दिखाई देने लगी है।