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UP:यूपी में आज 1.6 करोड़ नागरिक पा रहे पेंशन, पहले बाबू कट मांगता था...6 माह में मिलते थे- अब खाते में जाता है

Mon, 07 Apr 2025 11:00 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो

सार

सीएम योगी ने कहा कि आज 15 करोड़ लोगों को फ्री में राशन उपलब्ध कराया है। मशीन से उसकी निगरानी कर सकते हैं। आज यूपी में 1.6 करोड़ नागरिकों को पेंशन दे रहे हैं। पेंशन में से बाबू पहले कट मांगता था, 6 महीने में 1800 मिलते थे. किराया और कट के बाद कुछ बचता ही नहीं था. आज पेंशन सीधे खाते में जा रही है।
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सीएम योगी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि तकनीक हमसे संचालित हो, हम उससे नहीं। तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है। यह विश्वविद्यालय सतत नहीं समग्र विकास की परिकल्पना को लेकर कार्य कर रहा है। भारतीय मनीषा ने सतत की जगह समग्र विकास की परिकल्पना की थी।
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उसी समग्रता की झलक यहां देखने को मिल रही है। अगर हमारा पक्ष सतत का होता तो हम किसी एक पक्ष को लेकर काम करते. यह भारतीय दृष्टि है कि हम समग्रता को लेकर आगे बढ़ेंगे। सीएम योगी मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में नव नियुक्त शिक्षकों के प्रेरण कार्यक्रम और विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के दौरान संबोधित के रहे थे।
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उन्होंने कहा कि नए शिक्षकों को इस बात को ध्यान में रखना होगा कि कठिन परीक्षा के बाद उनका चयन हुआ है। जिस कार्य के लिए उनका चयन हुआ है, उसे साबित करना होगा। समग्र विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनकर कार्य करेंगे तो वही आपके लिए अवसर बनेगा।

विश्वविद्यालय पर कभी कोई डेंट आएगा तो कोई व्यक्ति उससे बच नहीं पाएगा। विश्वविद्यालय से जुड़ा हर व्यक्ति उन्नति और अवनति से जुड़ा है। आपसी खींचतान के कारण संस्थान की छवि प्रभावित होती है। आज का समय प्रतिस्पर्धा का है। कभी भारत दुनिया में शिक्षा और तकनीक में दुनिया का मार्गदर्शन करता था।

हम विश्वगुरु कहलाए। हम लीड कर रहे थे। 10वीं सदी में दुनिया की जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी आधी से अधिक थी। अंग्रेजों ने यहां की अर्थव्यवस्था को कैसे नष्ट किया, ये किसी से छिपा नहीं है। आजादी के बाद 2014 तक भारत केवल 11वीं अर्थव्यवस्था बन सका था। पिछले 10 वर्षों में हर क्षेत्र में काम हुए।

अगले दो वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। विकास दर दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था से तेजी से आगे बढ़ रही है। हर भारतीय आज खुद को साबित कर रहा है। यह संभावना पहले भी थी क्योंकि देश वही, संसाधन वही, केवल नेतृत्व बदला और आज भारत को दुनिया की उन ऊँचाइयों तक पहुंचाया जहां लोग ख्वाब देखते हैं।

दुनिया के सामने कोरोना का संकट आया। बहुत देशों की हालत खराब हो चुकी थी। भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरा भारत लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाये रखते हुए 140 करोड़ लोगों को फ्री में जांच, उपचार और वैक्सीनेशन कराया। जरूरतमंदों को राशन दिया।

याद रखना कोरोना में अवसर दिया जो धैर्य के साथ चुनौतियों का सामना करने वाला निखरता है जो नहीं करता वो बिखरता है। कुछ नयापन करने की सोचें। लीग से हटकर काम करें। समाज की जरूरत क्या है, उसपर काम करें। यही एक निजी विश्वविद्यालय होता तो फीस देना मुश्किल होता।

समाज से पैसा लेकर विभागों को दिया जाता है। बरसात में पानी नदियों के माध्यम से समुद्र में जाता है। फिर समुद्र से वास्प बनकर हर जगह बराबर बारिश होती है। उसी तरह ये सिस्टम है। हमारी जिम्मेदारी भी है समाज के प्रति। आप केवल कैंपस तक सीमित न रहें।

आपकी जिम्मेदारी है कि सस्ती तकनीक लोगों के लिए उपलब्ध कराएं। पर्यावरण की चुनौती है। सबके लिए सस्ता आवास उपलब्ध कराएं। तकनीक विकसित करें कि समाज में घट रही सामान्य घटना की जानकारी तुरंत मिले। जरूरत की हर चीज के बारे में जानकारी मिले, लेकिन ये इतनी महंगी न हो कि आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाए।

क्या हम कोई ऐसी तकनीक विकसित कर सकते हैं कि सरकार से दी जाने वाली राशि में गरीब आदमी मकान बनवा सकें? ईंट भट्टे के पास की जमीन बंजर हो जाती है। वहां का पानी भी गर्म मिलेगा। आसपास के बाग खत्म हो जाते हैं।

यह कहीं न कहीं पर्यावरण खराब कर रहा है। हर गांव में पहले खाद का गड्ढा होता था, जो यह बताता था कि सॉलिड वेस्ट को कहां इकट्ठा करना है। सालभर इकट्ठा होने के बाद लोग उसको खेत में डालते थे। अब शहर में डंपिंग ग्राउंड बने। जगह जगह कूडे के ढेर बन गए। चुनौती आपके सामने है।

सिविल के क्षेत्र में सस्ते आवास बनाना आपकी चुनौती है। इसे जल्दी में बनाकर खड़ा कर सकते हैं। हमें थोड़े प्रयास करने होंगे। हर व्यक्ति को अपना आवास चाहिए। ईज ऑफ लिविंग के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि तकनीक हमसे संचालित हो, हम उससे नहीं। 

तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है। आज 15 करोड़ लोगों को फ्री में राशन उपलब्ध कराया है। मशीन से उसकी निगरानी कर सकते हैं। आज यूपी में 1.6 करोड़ नागरिकों को पेंशन दे रहे हैं। पेंशन में से बाबू पहले कट मांगता था, 6 महीने में 1800 मिलते थे. किराया और कट के बाद कुछ बचता ही नहीं था. आज पेंशन सीधे खाते में जा रही है।

पहले सभी स्ट्रीट लाइट हैलोजन की रहती थी। इसमें ऊर्जा की खपत भी ज्यादा थी। बरसात के समय उसके नीचे कोई खड़ा नहीं हो सकता था। कीड़े आते थे बदबू आती थी। आज एलईडी स्ट्रीट लाइट लगी है, जिससे सालाना एक लाख करोड़ की बचत हो रही है। इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम हुआ है।

ऐसे हैं क्षेत्र में कर सकते हैं। ड्रेनेज में देसी तकनीक को अपना सकते हैं। स्थिरता के साथ सोचना पड़ेगा। चार साल पहले गोरखपुर नगर निगम पर एलजीटी ने पेनाल्टी लगाई। नाले का पानी राप्ती में सीधे जाता है। अधिकारियों से बात की तो एसटीपी का प्रोजेक्ट बनाकर लाए। इसे प्राकृतिक विधि से साफ करने के निर्देश दिए। पौधे और बोल्डर लगाकर इस तकनीक का उपयोग किया।

जिस काम में 110 करोड़ खर्च होने थे उसे 4 करोड़ में बना दिया। आज वह मॉडल बन गया है। नगर आयुक्त को प्रेजेंटेशन के लिए पहले नीति आयोग और फिर जर्मनी में बुलाया गया। इन पद्धतियों से ही हम समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। हम एआई और रोबोटिक का इस्तेमाल करें।

सीवर की सफाई में रोबोटिक का इस्तेमाल करें, लेकिन यह सस्ती होनी चाहिए। आज दुनिया कहां पहुंच चुकी है। विश्वविद्यालय ने कई रैंकिंग में स्थान प्राप्त किया है। अगले रैंकिंग में टॉप 50 में स्थान बनाएं। एशिया टॉप 100 में शामिल होने का लक्ष्य रखें। इससे ग्लोबल रैंकिंग में जाने के राह खुलेंगे।

 
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