गोरखपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि पर्यावरण और आध्यात्मिकता का घनिष्ठ संबंध है। अध्यात्म हमारे जीवन के उत्थान के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए भी प्रेरित करता है। प्रो. डीपी सिंह गोरखनाथ मंदिर में संगोष्ठी पर्यावरण रक्षा भविष्य की सुरक्षा विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत हुए कार्यक्रम में उन्होेंने कहा कि हमारी संस्कृति में प्रारंभ से ही व्यक्ति को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया जाता रहा है। जीव-जंतुओं से लेकर वनस्पतियों तक सभी में देव दृष्टि रखना हमारी संस्कृति की पहचान है। भारत की दृष्टि समग्र विकास की है। इसमें आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक आदि सभी के विकास के साथ ही पर्यावरण के सभी तत्वों की सुरक्षा की बात की जाती है।
सवाई आगरा से आए ब्रह्मचारी दासलाल महाराज ने कहा कि पर्यावरण हमारे चारों तरफ विद्यमान पांच तत्वों का आवरण है। सतुआबाबा आश्रम काशी के संतोषदास महाराज ने कहा कि हम सभी को पर्यावरण की सुरक्षा के लिए चिंता करनी चाहिए। गोरखपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं प्राणि विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डीके सिंह ने कहा कि पर्यावरण नई पीढ़ी के लिए चुनौती बन रहा है।
पूर्व कुलपति प्रो. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि हमारे यहां जब भी कोई धार्मिक अनुष्ठान होता है तो वहां एक शांति मंत्र का पाठ किया जाता है। इसे पर्यावरण मंत्र कहा जाता है। इस मंत्र में शांति शब्द, संतुलन के अर्थ में है।
संगोष्ठी में अयोध्या से महंत सुरेश दास महाराज, कटक से महंत शिवनाथ, अयोध्या से महंत राममिलन दास, प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन से महंत मिथलेश नाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, वाराणसी के योगी रामनाथ आदि उपस्थित रहे।