- हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से दोपहर में पीली बत्ती पर ट्रैफिक चलाने की अपील की गई थी
- 30 से 45 सेकेंड से भी मिल सकती है राहत
- कड़ी धूप में बंद रखे जाएं सिग्नल, पुलिसकर्मी खुद करें संचालन, फिर भी नहीं लागू हुई व्यवस्था
- दोपहर में 12 बजे से तीन बजे तक तपती दोपहरी में चौराहों पर खड़े हो रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दिन का पारा 42 डिग्री से पार होने लगा है। ऐसे में लू (हीट स्ट्रोक) खतरा बना रहता है। प्रचंड गर्मी को देखते हुए जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की ओर से यातायात पुलिस को पत्र भेजकर दोपहर के वक्त पीली बत्ती पर ट्रैफिक चलाने की अपील की गई थी। लेकिन, इसका असर यातायात पुलिस पर नहीं हुआ। तपती धूप में बदन जलता रहता है, लेकिन लोगों को चौराहों पर 174 सेकेंड तक खड़े होकर यातायात सिग्नल के हरे होने इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में ग्रीन सिग्नल के इंतजार में शहरी सूरज की तपिश की वजह से चौराहों पर पीले पड़ जा रहे हैं।
हरी बत्ती कबले जली..
मोहद्दीपुर, विश्वविद्यालय चौराहा, गणेश चौक और कचहरी सहित अन्य चौराहों पर बाइक सवार, ऑटो और ई रिक्शा सवार लोगों को काफी ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। शनिवार की दोपहर 12.13 बजे एयरपोर्ट की ओर से आने वाला सिग्नल बंद हुआ। उस समय पैडलेगंज की ओर से चार फाटक और एयरपोर्ट का रास्ता खुला हुआ था। एयरपोर्ट की तरफ से गोलघर की ओर जा रहे बाइक सवार हाटा निवासी मनोज वर्मा 20 सेकेंड बाद ही धूप में बिलबिला उठे। बुदबुदाने लगे कि दो मिनट में तो यहां पूरा बदन जल जाएगा। उन्होंने वहां मौजूद होमगार्ड से पूछा कि का हो भइया ई हरी बत्ती कबले जली..। होमगार्ड ने जवाब दिया कि इंतजार कीजिए। जब खुलेगा तब जाइएगा। हालांकि 174 सेकेंड के बाद बत्ती हरी हो गई। गोलघर और चार फाटक की ओर जाने वाले वाले तेजी के साथ आगे बढ़ गए। इसी चौराहे पर मौजूद रामसिंह, रमजान सहित अन्य लोगों ने कड़ी धूप में बीमार होने की आशंका जताई।
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विश्वविद्यालय चौराहा::
कड़क धूप लगी तो बच्चे को गमछे से ढका
दोपहर 12.58 बजे विश्वविद्यालय चौराहा (यूनिवर्सिटी) पर छात्रसंघ से रेलवे स्टेशन जाने वाला यातायात सिग्नल बंद था। गोलघर से मोहद्दीपुर से और छात्रसंघ की ओर जाने वाला यातायात चल रहा था। कड़ी धूप की वजह से टीएसआई संजय कुमार कोने में पेड़ के नीचे छांव में खड़े थे। यहां मौजूद चार होमगार्ड चारों ओर नजर रखते हुए बाईं लेन में खड़े लोगों को सजग कर रहे थे। छात्रसंघ की ओर से आने वाले रोड पर बाइक सवार रंजन कुमार, देवव्रत और अन्य लोग खड़े थे। रंजन की बाइक पर पीछे एक महिला और छोटा बच्चा था। धूप लगने पर महिला ने बच्चे को गमछे से ढक दिया। वह दवा लेने छात्रसंघ चौराहे पर गए थे। वहां से लौटते हुए छात्रसंघ चौराहा के बाद यूनिवर्सिटी चौराहे पर यातायात सिग्नल को पार करना पड़ा। रंजन ने कहा कि जब हम लोगों का बदन जल रहा है तो बच्चे की हालत क्या होगी, यह आसानी से समझा जा सकता है। अन्य लोगों ने भी तेज धूप में टाइमिंग (समय) बदलने की बात की।
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गोलघर::
नियम बना है तो मानना ही पड़ेगा
दोपहर 1.27 बजे गणेश चौराहे पर काली मंदिर से कचहरी का रूट चल रहा था। इसलिए काली मंदिर और सिनेमा रोड की तरफ जाने वाला सिग्नल बंद था। पीपीगंज के मछरिहा निवासी संदीप बाइक से अपनी मां संग हरिओम नगर से लौट रहे थे। उनके अगल-बगल में कई अन्य बाइक सवार खड़े होकर यातायात खुलने का इंतजार कर रहे थे। इस चौराहे पर एक महिला दीवान, सिपाही और पांच होमगार्ड तैनात थे। धूप की वजह से शेरे पंजाब होटल के पास बने पुलिस बूथ में सिपाही बैठे थे, दो होमगार्ड गोलबंर के नीचे खड़े होकर यातायात संभाल रहे थे। जबकि दो होमगार्ड होटल गणेश की ओर छांव में नजर आए। बदल झुलसाने वाली धूप और गर्मी से परेशान संदीप ने कहा कि कदम-कदम पर यातायात सिग्नल लगा हुआ है। हर चौराहे पर दो से तीन मिनट खड़ा होना पड़े हालत खराब हो जाएगी। लेकिन नियम बना है तो मानना ही पड़ेगा।
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शास्त्री चौराहा:
इतनी धूप है तो बच बचाकर काम करना पड़ता है
दोपहर 2.05 बजे कचहरी चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी और होमगार्ड छायादार जगहों पर दुबके नजर आए। शास्त्री चौराहे से गणेश का यातायात बंद होते ही हरिओम नगर से टाउनहाल का सिग्नल शुरू हो गया। शास्त्री चौराहे की तरफ जाने वाले लोग खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। यहां बाइक सवार धूप से काफी परेशान रहे। लोगों से बातचीत करते देखकर कचहरी के कोने पर मौजूद पर होमगार्ड नागेश्वर ध्वज सिंह आ गए। उन्होंने कहा कि चार- पांच लोग ड्यूटी पर हैं। इतनी धूप है तो बच बचाकर काम करना पड़ता है।
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मैनुअली यातायात चलाने, टाइमिंग घटाने को लिखा था पत्र
जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एडीएम राजेश कुमार सिंह की ओर से एसपी ट्रैफिक और नगर आयुक्त को 20 मई को पत्र लिखा गया था। पत्र में शहरी क्षेत्र में बढ़ रहे तापमान के कारण लू की आशंका जताते हुए दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक प्रमुख चौराहों पर पीली बत्ती पर ट्रैफिक चलाने को कहा गया था। यातायात को मानव संकेतों (मैनुअली) पर संचालित करते हुए जिस तरफ ज्यादा दबाव हो। उसे जल्द से जल्द से चलाया जाए। यातायात सिग्नल की टाइमिंग जो 1.50 मिनट से लेकर 2.50 मिनट तक है। उसकी अवधि को 30 से 45 सेकेंड किया जाए। यातायात कंट्रोल रूम से लू से बचाव के उपाय बताए जाएं। व्यापारियों और अन्य लोगाें की मदद से चौराहों पर निशुल्क पेयजल उपलब्ध कराई जाए। हालांकि इसका पालन नहीं हो सका है। जिला प्रशासन के पत्र को यातायात पुलिस ने दरकिनार कर दिया।
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मौसम को देखते हुए पुलिस अधीक्षक यातायात को इस संंबंध में पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। ताकि लू के प्रकोप से लोगों को बचाने में मदद मिल सके। अब इसके अनुपालन में क्या समस्या आई है। इसकी जानकारी नहीं है। हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए हम सभी से गुजारिश ही कर सकते हैं।
राजेश सिंह, एडीएम, मुख्य कार्यपालक अधिकारी- जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण
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जिला आपदा प्रबंधन की ओर से जो सुझाव मिले थे। उनके संबंध में जानकारी दी गई है। यातायात का दबाव होने पर मानव संकेतों से चौराहों पर व्यवस्था संचालित की जाती है। सिग्नल की टाइमिंग पहले से ही कम है। आगे इसको लेकर जो भी सुझाव आएंगे। उन पर अमल किया जाएगा।
डॉ. एमपी सिंह, एसपी ट्रैफिक