प्राथमिक विद्यालयों में ज्यादातर बच्चों के खाते में ड्रेस के लिए भेजे जा चुके पैसे
अध्यापिकाओं का आरोप, अभिभावक नहीं खरीदते ड्रेस, खर्च कर देते हैं रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। ठंड ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार को परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ठंड से ठिठुरते नजर आए। ज्यादातर बच्चे चप्पल पहने ही स्कूल पहुंचे थे। वहीं कई बच्चे घर की स्वेटर पहने थे, जबकि शासन की ओर से इनके अभिभावकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से ड्रेस के लिए 1200 रुपये सितंबर में ही भेज दिए गए हैं। लेकिन, उन्होंने बच्चों की ड्रेस नहीं खरीदी।
दोपहर करीब एक बजे : प्राथमिक विद्यालय बनकटी में शिक्षण कार्य चल रहा था, यहां ज्यादातर बच्चे ड्रेस में थे, कुछ बच्चों ने ड्रेस कोट में मौजूद मैरून रंग की स्वेटर की जगह दूसरे रंग के ब्लेजर व स्वेटर पहने हुए थे। विद्यालय के इंचार्ज अध्यापिका उर्मिला राय ने बताया कि विद्यालय में 97 बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें 87 बच्चों के अभिभावकों के खाते में ड्रेस के लिए पैसे आ गए हैं, आधार की दिक्कत के कारण कुछ बच्चों के अभिभावकों के खातों में रुपये नहीं गए हैं, जो जल्द ही आ जाएंगे।
दोपहर एक 1:30 बजे : कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय अलहदादपुर में शिक्षण कार्य तो चल रहा था, लेकिन यहां ज्यादातर बच्चे बिना ड्रेस के नजर आए। इनमें कई बच्चे चप्पलों में ही दिखाई दिए। बच्चों ने स्वेटर तो पहने थे, लेकिन वे ड्रेस न होकर घर के थे। यहां कक्षा छह में पढ़ने वाले आदित्य से पूछा गया कि वह बिना जूतों के स्कूल क्यों आया है, तो बताया कि पापा ने अभी खरीदा नहीं है। इसी सवाल पर यही जवाब कक्षा पांच में पढ़ने वाली प्रिया ने भी दिया। विद्यालय के इंचार्ज अध्यापिका सरिता दूबे ने बताया कि यहां पंजीकृत 121 बच्चों में 88 बच्चों के अभिभावकों के खातों में पैसे पहुंच गए हैं। बताया कि बच्चों के अभिभावक पैसे मिलने के बाद भी ड्रेस नहीं खरीदते हैं। इसकी शिकायत बार-बार अभिभावकों से की जाती है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। बच्चे बिना जूता के ही स्कूल आते हैं। आदित्य के पिता उमेश से ड्रेस को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि पैसे आ गए हैं, जल्दी ही स्वेटर खरीद लूंगा।
दोपहर दो बजे : प्राथमिक विद्यालय बहरामपुर के दोनों कमरों में पढ़ाई चल रही थी, यहां ठंड के बावजूद ज्यादातर बच्चे चप्पलों में तो कुछ घरों के कपड़े पहने पहुंचे थे। प्रधानाध्यापिका अंजुम आरा छुट्टी पर थीं, उनकी गैर मौजूदगी में सहायक अध्यापिका दुर्गावती पांडेय बच्चों को पढ़ा रही थीं। जब उनसे बच्चों के चप्पलों में स्कूल आने की वजह पूछी गई तो उन्होंने भी बच्चों के अभिभावकों पर दोष मढ़ते हुए कहा कि यहां 144 बच्चे पंजीकृत हैं, सिर्फ आधार के कारण की 17 बच्चों के खाते में ड्रेस के रुपये नहीं पहुंचे हैं।
कोट
जिले में 1.93 हजार बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस की धनराशि सितंबर में ही जा चुकी है। शेष बचे बच्चों के अभिभावकों के खातों में इसी महीने चली जाएगी।
- वीरू प्रजापति, डीसी सामुदायिक सहभागिता, बेसिक शिक्षा विभाग