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पूर्वी उत्तर प्रदेश में आपदा के जोखिम कम करने व पौधों के जैव सम्भावनाएं तलाशेंगे

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पूर्वी उत्तर प्रदेश में आपदा के जोखिम कम करने व पौधों के जैव सम्भावनाएं तलाशेंगे गोविवि के दो विभागों में शोध के लिए स्थापित होगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी पूर्वांचल में आपदा के जोखिमों को कम करने और वनस्पतियों की जैव सम्भावनाएं तलाशेंगे। इसके लिए भूगोल विभाग एवं वनस्पति विज्ञान विभाग में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना होगी। दोनों विभागों को दस-दस लाख रुपये का अनुदान उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस योजना के तहत मिला है। भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. शिवाकांत सिंह ने अपने सभी विभागीय सहयोगियों का आभार जताते हुए बताया कि \"डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन इन ईस्टर्न उत्तर प्रदेश\" विषय पर बनाए गए प्रस्ताव पर यह उपलब्धि हासिल हुई है। इसके तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश में आपदा के जोखिमों को कम करने के लिए डाटा बेस तैयार किया जाएगा। वहीं, वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. बी.एन. पाण्डेय ने कहा कि 'बायो-प्रोस्पेक्शन ऑफ प्लांट्स फॉर फ़ूड एन्ड मेडिसिन' पर बने प्रस्ताव का परीक्षण एक्सपर्ट्स पैनल द्वारा किया था, जिसके बाद यह अनुदान प्राप्त हुआ है। इसमें सभी विभागीय सहकर्मियों और संकायाध्यक्ष का सहयोग मिला। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने सभी को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि,\"सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए शोध के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो सकेगा और इसके परिणामों से आम लोगों को भी लाभ मिलेगा। दोनों विभागों के लिए मिले 10-10 लाख रुपये शोध पर खर्च की जाएगी\" मीडिया प्रभारी प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालयों में सेंटर आफ एक्सीलेंस की स्थापना का उद्देश्य उच्च शोध के जरिए बेहतर कार्य कराया जाना है। पहले शासन द्वारा सभी विवि से प्रस्ताव मांगा जाता है। उसके बाद शासन द्वारा विश्वविद्यालयों से मिले प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जाता है और अनुदान की स्वीकृति मिलती है।
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