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Gorakhpur News: अमित के मिलने से परिवार में जश्न, मासूमों को मिला पिता का साया

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तीन साल से लापता अमित बांग्लादेश बार्डर पर दयनीय स्थिति में मिले
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खोराबार इलाके के खिरवनिया झरवां चौराहे के हैं रहने वाले

पूरे दिन परिवार में रहा जश्न का माहौल, शुभचिंतकों का लगा रहा तांता
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बांग्लादेश बार्डर पर गणित का सवाल हल करते मिले मानसिक रूप से बीमार अमित के घर आने पर परिवार में जश्न का माहौल है। अमित के मिलने की जानकारी पर बुधवार को पूरे दिन शुभचिंतकों का तांता लगा रहा। अमित के घर आने से जहां माता-पिता के खुशी का ठिकाना नहीं है, वहीं उनके दो मासूम बेटों के चेहरों पर भी रौनक लौट आई है। वह पिता के पास बैठ कर अठखेलियां करते रहें।

बुधवार को दिन में करीब एक बजे गामा प्रसाद, उनकी पत्नी सुभानी और बेटी मकान के पहली मंजिल पर अमित के पास बैठे हुए थे। दोनों बेटे अभिजीत (11) व अर्जित (9) पिता अमित से अठखेलियां कर रहे थे। पास बैठी मां सुभानी देवी कभी अमित को देखती तो कभी दोनों पोतों को देख रहीं थीं। मासूम बेटों को पिता का साया मिलने का सुकून उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। गामा ने बताया कि बांग्लादेश बार्डर पर अमित जब मिला तो उसके सिर के बाल बड़े होने के साथ लट बन गए थे। वह सोमवार की शाम अमित को लेकर घर पहुंचे। दूसरे दिन मंगलवार को वह अमित का बाल कटवाने के बाद उसे ले जाकर डॉक्टर को दिखाया, जहां उसका पहले उपचार चल रहा था। पिता का कहना है कि अब वह अच्छे तरीके से उसका उपचार कराएंगे। इस बीच अमित आने-जाने वालों से पढ़ाई-लिखाई की बात करते रहे। खड़ी हिंदी बोली के बीच में वह मजे अनुभवी की तरह अंग्रेजी के शब्द का प्रयोग कर रहे थे।
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बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थे अमित

खोराबार इलाके के खिरवनिया, झरवां चौराहा निवासी गामा प्रसाद के तीन पुत्र व तीन बेटियों में सबसे बड़े अमित पढ़ाई में बचपन से ही होनहार थे। आचार्य नरेंद्र देव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लहसड़ी से 12वीं तक की पढ़ाई किए। पढ़ाई में होनहार होने पर आगे की शिक्षा के लिए गांव वालों ने चंदा लगाकर पढ़ाने का निर्णय लिया। बीए की पढ़ाई के लिए केवला महासुंदर महाविद्यालय, बरहुआं में प्रवेश कराया। इस दौरान वह एक स्कूल में भी पढ़ाना शुरू कर दिए। पिता गामा ने बताया कि वर्ष 2010 में डिप्रेशन की शिकायत पर शहर के एक मानसिक चिकित्सक से उनका उपचार शुरू करवाया गया। वर्ष 2011 में अमित की शादी महेवा निवासी सोनम से हुई। शादी के बाद माता-पिता से दूरी बढ़ गई। जिसके बाद अनवरत चलने वाली दवा ब्रेक होने पर उनकी मानसिक स्थिति और खराब होने लगी। अमित अचानक घर से लापता हो जाते और एक-दो दिन बाद वापस आ जाते थे। अक्टूबर 2021 में वह जब लापता हुए तो फिर घर नहीं आए। पिता गामा व भाई सूरजभान व प्रमोद काफी तलाश किए, लेकिन उनका पता नहीं चला।
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पश्चिम बंगाल की पुलिस ने खोराबार पुलिस से साधा संपर्क

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सीमा पर स्थित उत्तर 24 परगना के पेट्रापोल इलाके में अमित एक पेड़ के नीचे गीली मिट्टी में लकड़ी से गणित के सवाल हल कर रहा था। उसकी मानसिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इस दौरान स्थानीय लोगों ने जब उनके बारे में पूछा, तो अमित ने हिंदी में जवाब दिया, “मुझे अकेला छोड़ दीजिए, मुझे गणित हल करना है।” इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पेट्रापोल पुलिस की पूछताछ में उसने अपना पूरा नाम पर पता बताया। इसके बाद वहां की पुलिस ने खोराबार पुलिस के पास वीडियो भेजकर परिजनों का पता लगाया। जानकारी होने के बाद परिजन 10 अगस्त को कार से पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल के लिए रवाना हो गए। अमित जहां रह रहा था वहां से बांग्लादेश बार्डर महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित था।
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