वहीं, शीला सहित चार अन्य मरीज भर्ती मिले। टीम ने जब अस्पताल की जांच की तो अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई भी अभिलेख नहीं दिखाया जा सका। न ही अस्पताल में कोई स्थायी डॉक्टर मौजूद मिला। वहीं, रिसेप्शन काउंटर पर प्रदीप नामक युवक मिला, जिसने बताया कि एमकेसी सेवा संस्थान के मालिक योगेश चतुर्वेदी हैं।
जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भर्ती मरीजों को तुरंत डिस्चार्ज करने के निर्देश देकर अवैध हॉस्पिटल को सील कर दिया। अब पुलिस ने रिसेप्शनिस्ट प्रदीप और हॉस्पिटल संचालक योगेश चतुर्वेदी के खिलाफ जालसाजी और इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 15(3) में केस दर्ज किया है।
उधर, एडिशनल सीएमओ डॉ. एके चौधरी ने कैंट पुलिस को दिए तहरीर में लिखा है कि 22 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग की टीम सिटी मजिस्ट्रेट के साथ रुस्तमपुर स्थित डायमंड हॉस्पिटल और उसी परिसर में चलने वाले दुलारी डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच की।
जांच के दौरान अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। कुछ मरीज भर्ती मिले, जिनका ऑपरेशन हुआ था। जबकि, जांच के दौरान अस्पताल में मौजूद हनुमान मौर्या की ओर से अस्पताल का कोई भी कागजात नहीं दिखाया जा सका। जिसके बाद टीम ने मरीजों को डिस्चार्ज कर अस्पताल सील कर दिया। अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संचालक पर केस दर्ज कराया है।