दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में जुलाई 2023 में तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह व कुलसचिव प्रो. अजय सिंह के साथ मारपीट से जुड़े मामले में बड़ी खबर है। डीडीयू प्रशासन ने आरोपी 17 छात्रों का निष्कासन निरस्त कर दिया है। कैंट थाने की तरफ से विवेचना में फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद यह केस कोर्ट में पहले ही खत्म हो चुका है। इसे लेकर डीडीयू में खूब चर्चाएं हो रही हैं। बताया जा रहा है कि डीडीयू के तत्कालीन मुख्य नियंता प्रो. गोपाल प्रसाद ने दो महीने पहले 25 अप्रैल को छात्रों का निष्कासन निरस्त कर दिया था।
इससे संबंधित आदेश अब सार्वजनिक हुआ है। तत्कालीन नियंता ने जारी आदेश में कहा है कि 21 जुलाई 2023 को विवि के प्रशासनिक भवन में हुई घटना के संबंध में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय की ओर से वाद संख्या 793/2024 में विवेचक की अंतिम रिपोर्ट एवं वादी के प्रार्थना को स्वीकार करते हुए अपने 6 जून 2024 के आदेश के तहत वाद को निरस्त कर दिया गया है।
इसके आलोक में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने 23 अप्रैल 2025 को इन छात्रों का निष्कासन निरस्त किए जाने का आदेश दिया है। इसी क्रम में निष्कासन निरस्त किया जाता है।
इन छात्रों का निष्कासन हुआ निरस्त
मयंक कुमार राय, ऋषभ सिंह, सौरभ गौड़, ओमकार मिश्र, अनुराग मिश्र, शक्ति प्रताप सिंह, शिवम पांडेय, प्रभात राय, सूरज मौर्या, प्रिंस तिवारी, चंद्रपाल सिंह यादव, शुभम गोविंद राव, संजीव त्रिपाठी, प्रतीक रंजन सिंह, पीयूष कुमार, अर्पित कसौधन, दीपक पाण्डेय का निष्कासन निरस्त किया गया है।
यह था मामला
डीडीयू में शुल्क वृद्धि के विरोध में एबीवीपी के कार्यकर्ता लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। 21 जुलाई 2023 को उनका प्रदर्शन उग्र हो गया था। प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शनकारियों ने बिना वार्ता किए निकल रहे तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह से धक्का-मुक्की करने के साथ ही उनकी गर्दन मरोड़ दी थी। तत्कालीन कुलसचिव प्रो. अजय सिंह को बुरी तरह से पीटा गया था।
पुलिस ने उग्र छात्रों पर लाठीचार्ज कर हालात को नियंत्रित किया था। कुलपति की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त कर दी थी। इस दौरान पुलिस से भी छात्रों की झड़प हुई थी। मामले में पुलिस ने 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इससे संबंधित कई मामले सोशल मीडिया पर महीनों वायरल हुए थे। यह घटना - राष्ट्रीय सुर्खियों में भी छाई रही थी।