हिंदी बाजार के एक बड़े सराफा व्यापारी और परिवार के सदस्यों पर फर्जी बैनामा कराने का आरोप लगा है। पीड़ित का आरोप है कि फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर जमीन और मकान का बैनामा करा लिया गया। फर्जी बैनामे की जांच भी गोपनीय तरीके से जिले के एक पुलिस अधिकारी की तरफ से की गई थी, लेकिन इस रिपोर्ट को पुलिस ने दरकिनार कर दिया।
तब पीड़ित ने सभी प्रपत्रों के साथ न्यायालय की शरण ली। प्रार्थनापत्र की सुनवाई करते हुए एसीजेएम ज्ञानेंद्र कुमार द्वितीय ने कोतवाली थाने को एक सप्ताह के भीतर केस दर्ज कर न्यायालय को सूचना देने का आदेश जारी किया है।
कोतवाली इलाके के पुर्दिलपुर की रहने वाली शर्मिला घोष ने बताया कि उनके बाबा खगेंद्र नाथ घोष ने 1938 में घर बनवाया था। पूर्वजों की मौत के बाद शर्मिला घोष का नाम भवन पर दर्ज चला आ रहा है। शर्मिला का आरोप है कि उनके 1402 वर्ग फीट मकान और 5000 वर्ग फीट खाली जमीन को हड़पने के लिए सराफा परिवार ने फर्जी व्यक्ति खड़ा कर 31 मई 1996 में कूटरचित रजिस्ट्री बैनामा करवा लिया।
फर्जी बैनामा के आधार पर पुश्तैनी मकान पर मिलीभगत कर नगर निगम में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया। अवैध रूप से कागजों में नाम चढ़वाने के बाद आरोपियों की तरफ से आए दिन विधिविरुद्ध तरीके से बेदखल कर पीड़िता के भवन व जमीन पर कब्जा करने की धमकी दी जाती है।
न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र के माध्यम से पीड़ित ने बताया कि इस मामले में उनकी तरफ से 15 दिसंबर 2022 को एसएसपी को आईजीआरएस कर शिकायत की गई थी। इसी आधार पर क्षेत्राधिकारी कैंट को मामले की जांच सौंपी गई थी।
प्रपत्रों की जांच कर सहायक निरीक्षक निबंधन से पत्राचार कर जमीन के संबंध में आख्या मांगी थी। इस जांच में भी साफ हो गया था कि संबंधित जमीन, जिसका बैनामा किया गया था, वह विधिक रूप से सही नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद भी आरोपियों पर केस पंजीकृत नहीं हो सका।
हालांकि, इसके पहले भी पीड़िता की तरफ से न्यायालय में धारा 156 (3) के तहत केस की सुनवाई और आदेश के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया था। दो जून 2023 को न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया था।
घर में घुसकर दी मारने की धमकी
शर्मिला का आरोप है इसके बाद से ही यह लोग घर और जमीन पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाने लगे। दो सितंबर 2022 को सराफा व्यापारी 10-12 लोगों के साथ घर में घुस गया। वे धमकी देने लगे कि यहां से भाग जाओ, वरना परिवार समेत इसी घर में दफन कर देंगे।
इसके बाद पिता और पुत्र को पीटने लगे। शोर सुनकर आस-पास के लोगों ने बीच-बचाव किया। इसकी सूचना पीड़िता ने 112 पर भी दी। आरोप है इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
हमेशा चर्चा में रहता है हिंदी बाजार
हिंदी बाजार आए दिन किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहता है। सराफा बाजार में अधिकतर आंतरिक मामलों में पहले यहीं पर पंचायत होती है, फिर मामले को आगे बढ़ाया जाता है। पूर्व व वर्तमान पदाधिकारी इस पंचायत में रहते हैं।
अभी कुछ दिन पहले एक व्यापारी के खिलाफ कुछ व्यापारियों ने पंचायत कराई थी तो पदाधिकारियों ने आरोपी दुकानदार के यहां जबरन ताला लगा दिया। एक पंचायत के दौरान दो व्यापारियों ने मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग बना ली थी।
इस वजह से यह मामले आगे नहीं बढ़ा। बाजार से आए दिन कर्मचारी और धंधेबाजों द्वारा अवैध सोना लेकर लापता होने की बात सामने आती रहती है। कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है, लेकिन संगठन की शह पर धंधेबाज बेखौफ धंधा करते रहते हैं।