सदर तहसील परिसर में जमीन के धंधेबाजों ने जालसाजी का नया पैंतरा अपनाया है। ये धंधेबाज अनुसूचित जाति की जमीन को डीएम से अनुमति लिए बिना गैर अनुसूचित जाति के लोगों को बेच दे रहे हैं। रजिस्ट्री के समय मामला पकड़ में न आए, इसके लिए बड़ी चालाकी से जाति के साथ चौहद्दी भी बदल दे रहे हैं।
ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा है कि अगर पोल खुले और संपत्ति सरकार के पक्ष में जब जब्त हो तो उस दौरान गलत चौहद्दी के चलते दूसरे की संपत्ति ही सरकार के कब्जे में जाए। चौहद्दी बदलने की शिकायत पर जांच में इस पूरे खेल का खुलासा हुआ है। अब तक चार मामले पकड़े जा चुके हैं, जिसके बाद हड़कंप मच गया है।
शहर की कीमती जमीनों की अच्छी कीमत के लिए धंधेबाज, अनुसूचित जाति के लोगों से सांठगांठ कर उसे गैर अनुसूचित जाति के लोगों को बेच रहे हैं। दाखिल-खारिज के समय अगर आपत्ति आई तो मामला पकड़ में आएगा, वरना गलत तरीके से जमीन खरीदने वाले बाद में फंसेंगे।
राजस्व संहिता की धारा 98 के अनुसार, यदि अनुसूचित जाति के व्यक्ति बिना डीएम की अनुमति के अपनी जमीन गैर अनुसूचित जाति के क्रेता को बेचता है और जांच में यह साबित होता है तो संपत्ति राज्य सरकार की हो जाएगी, जबकि दस्तावेज भी शून्य घोषित हो जाएगा। रजिस्ट्री कार्यालय से तहसील कार्यालयों में इस प्रकार के कई मामले पकड़ में आ चुके हैं।
चौहद्दी बदलने की खबर पर दाखिल हुई आपत्ति
शहर के महेवा मुस्तकिल के रवींद्र नाथ सिंह एवं सलिल गिरि ने आपत्ति दाखिल की कि एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति ने निषाद जाति दर्शाकर अपनी जमीन बेच दी है, लेकिन उन्होंने जो जमीन की चौहद्दी दी है, उसमें उनकी जमीन नहीं है।
बैनामा के बाद दाखिल खारिज की जांच हुई तो लेखपाल की जांच में विक्रेता अनुसूचित जाति का निकला। दस्तावेज के अनुसार, अनुसूचित जाति की प्रभावती देवी ने 21 जुलाई 2022 को नम्रता सिंह व अवध नारायण ओझा को जमीन बेची है, जबकि इसके पहले ही इसी खतौनी में अनुसूचित जाति के जगदीश ने कंचन मिश्रा को जमीन बेची थी।
इस मामले में नायब तहसीलदार खोराबार ने 22 नवंबर 2023 को एसडीएम न्यायालय में जांच रिपोर्ट भेज दी है।
महादेव झारखंडी के मामले में भी हुआ आदेश
शहर के महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर एक में अनुसूचित जाति की पानमती ने निषाद जाति बताकर अपनी जमीन बेच दी थी। इस मामले में आपत्ति दाखिल होने के बाद लेखपाल की जांच में हकीकत सामने आई। इस मामले में भी नायब तहसीलदार खोराबार ने जमीन को राज्य सरकार के पक्ष में राजसात करने के लिए एसडीएम न्यायालय में पत्रावली भेज दी है।
अधिवक्ता की राय
अधिवक्ता कलेक्ट्रेट कचहरी विकास श्रीवास्तव ने बताया कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति यदि गैर अनुसूचित जाति के क्रेता को जमीन बेचता है तो गंभीर बीमारी, बेटी की शादी या किसी अन्य स्थान पर जमीन खरीदने के आधार पर प्रार्थनापत्र देकर डीएम से अनुमति मांगता है। डीएम अनुमति प्रदान करते हैं तो बैनामा वैध होता है।
तथ्य छिपाकर जमीन का खरीद-फरोख्त करने का खुलासा होता है तो क्रेता और विक्रेता दोनों पक्ष को मुसीबत का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामले में क्रेता की ओर से विक्रेता पर केस दर्ज कराया जा सकता है, जबकि रजिस्ट्री में तथ्य छिपाने के मामले में अन्य लोग भी दोषी साबित होंगे।
सब रजिस्ट्रार खंड दो प्रसेनजीत सिंह ने बताया कि महेवा मुस्तकिल के केस में रजिस्ट्री के दस्तावेज में विक्रेता ने अपनी जाति निषाद घोषित की थी। दस्तावेज में अनुसूचित जाति दर्ज नहीं था इसलिए डीएम के अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। इस खतौनी में तीन बैनामे हुए हैं। रजिस्ट्री के दस्तावेजों में तथ्य छिपाने के मामले में अब एसडीएम न्यायालय से कार्रवाई का आदेश जारी किया जाएगा।
तहसीलदार विकास सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम की जांच में यदि साबित हुआ है कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति ने बिना डीएम की अनुमति के गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को जमीन बेची है तो राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी। इस मामले में पत्रावलियों के आधार पर एसडीएम न्यायालय से आदेश जारी किया जाएगा।