गोरखपुर के सराफा मंडल के अध्यक्ष के साथ दशहरे के दिन हुई मारपीट की घटना मामले में कार्रवाई की मांग के मुद्दे को लेकर व्यापारी नेता सोशल मीडिया पर आपस में ही भिड़ गए। एक दूसरे पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। इसी बीच कुछ व्यापारी नेताओं ने एक पक्ष के समर्थन में लामबंदी शुरू की, तो कुछ अन्य ने आपसी मतभेद को किनारे कर व्यापारियों से जुड़े मुद्दों पर एक राय होने की अपील की।
दरअसल, शहर के व्यापारियों का पूर्वांचल उप्र व्यापार मंडल नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप है। व्यापारी नेता मणिनाथ गुप्ता और रमेश गुप्ता इसके एडमिन हैं। नरेंद्र नाम से जुड़े एक नंबर से मंगलवार दोपहर 12.37 और 12.47 बजे बाद संदेश आया। इसका मजमून कुछ यूं था कि सराफा मंडल के अध्यक्ष के साथ दशहरे के दिन हुई मारपीट की घटना और सोने की चेन छीने जानी वाली घटना गलत है। मैसेज में लिखा था कि ऐसे सम्मानित पद पर रहने के साथ किसी को झूठे केस में फंसाने का क्या फायदा?
1.18 बजे ग्रुप के संचालक मणिनाथ गुप्ता ने मैसेज कर पूछा, भाई साहब नमस्कार, यह क्या है? अगले मिनट आई मिस यू पापा के नाम से सेव नंबर की तरफ से मैसेज आया कि, पद की ग्रुपबाजी। थोड़ी देर बाद सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज गोयल ने मैसेज लिखा, श्रीमानजी मेरे साथ जो घटना घटी है, उसकी पूरी रिकार्डिंग प्रशासन के सीसीटीवी कैमरे में मौजूद है, पहले देख लें, उसके बाद बोलना सीखें। आपके व्यक्तित्व के बारे में मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं। हम सभी जानते हैं कि आपके होटल पर किस तरीके का कार्य होता है। आपके संबोधन के लिए धन्यवाद।
1.54 बजे दवा व्यापार संघ के अध्यक्ष योगेंद्र दूबे ने सराफा मंडल के अध्यक्ष के समर्थन में अपना मैसेज किया। लिखा कि पूरा व्यापार मंडल आपके साथ है। इसके जवाब में नरेंद्र नाम वाले नंबर से वापस एक मैसेज आया कि आपका मेरे होटल पर स्वागत है और होटल में क्या होता है प्रकाश डालें। इसके बाद शिवराज मलकानी और मणिनाथ गुप्ता ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की।
दुकानें बंद कर विरोध का निर्णय वापस
सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि राज्य मंत्री पीडी जैन के नेतृत्व में व्यापारियों की एक बैठक बुलाई गई। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए बुधवार को दुकानें बंद करने के फैसले को व्यापारियों ने वापस ले लिया है। प्रधानमंत्री के दौरे के बाद व्यापारियों की मुलाकात एडीजी से होगी। उनके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। प्रमुख व्यापारी नेता व मेयर सीताराम जायसवाल ने बताया कि दवा विक्रेता समिति, गल्ली कमेटी, किराना कमेटी, गोलघर व्यापार मंडल के अलावा अन्य संगठनों ने हड़ताल के फैसले को वापस ले लिया है। कुछ शरारती तत्वों ने दशहरे मूर्ति विसर्जन के दौरान हंगामा करने की कोशिश की गई थी। जिसे पुलिस की सक्रियता से रोक दिया था।