गोविवि में इतिहास विभाग के पुस्तकालय (प्रो. चन्द्रभूषण अंकुर के कक्ष) का ताला तोड़ने के लिए जुटे
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के भूतल में स्थित कमरा नंबर 27 पर कब्जे को लेकर छह माह से छिड़े संग्राम पर बुधवार की शाम विराम लग गया। मुख्य नियंता के नेतृत्व में पहुंची विवि प्रशासन की टीम ने कमरे का ताला तोड़कर अंदर रखा सामान बाहर निकाल संबंधित शिक्षक को कमरे की चाभी सौंप दिया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के भूतल में स्थित कमरा नंबर 27 इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. चंद्रभूषण गुप्ता अंकुर को पिछले दो दशक से आवंटित था। इस बीच 25 फरवरी 2023 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने पत्र लिखकर कमरे को अर्थशास्त्र के शिक्षक डॉ. राजू गुप्ता व डॉ. सुरेंद्र गुप्ता को आवंटित करते हुए उनसे कमरे की चाभी मांगी। इस पर प्रो. गुप्ता ने अपना सामान रखने के लिए कोई और कमरा देने की मांग की। इस पर अप्रैल माह में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमरे को सील कर दिया। हालांकि 12 अगस्त को सील खोल दिया गया। 14 अगस्त को मुख्य नियंता ने प्रो. गुप्ता को पत्र भेजकर कमरे की चाभी मांगी। बुधवार को प्रो. ने कुलपति, कुलसचिव के कार्यालय में पत्र भेजकर अपने पक्ष से अवगत कराया। उन्होंने पत्र की प्रति मुख्य नियंता कार्यालय में भी भिजवाया लेकिन कर्मचारियों ने लेने से मना कर दिया। दोपहर करीब 12 बजे मुख्य नियंता ने प्रो. गुप्ता के दफ्तर पहुंच कर चाभी मांगा। प्रोफेसर के चाभी देने से मना करने पर शाम करीब 4 बजे उप कुलसचिव, रजिस्ट्रार के प्रतिनिधि समेत अन्य लोगों के साथ मुख्य नियंता कला संकाय पहुंचे। पूरी टीम की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़कर अंदर रखा आलमारी समेत अन्य सामान बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद कमरे में दूसरा ताला लगाकर चाभी अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षक राजू गुप्ता को सौंप दिया गया।
साजिश के तहत किया जा रहा परेशान- प्रो. चंद्रभूषण
इस संबंध में प्रो. चंद्रभूषण गुप्ता ने कहा कि उनको साजिश के तहत परेशान किया जा रहा है। अभी 30 जून 2024 तक उनकी नौकरी है। विभागाध्यक्ष कक्ष आज है कल नहीं रहेगा। उसके बाद वह किसी कमरे में बैठेंगे। इसके लिए उन्होंने एक कमरे की मांग की थी, लेकिन दूसरे कमरे का आवंटन किए बिना ही उनका सामान बाहर निकाल दिया गया। आरोप है कि कार्यपरिषद 2021 की बैठक में कुलपति द्वारा कमलेश गुप्ता के निलंबन का विरोध करने की सजा उनको दी गई है।