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Gorakhpur News: बीआरडी में यहां तो हद है! शिकायत पर पिटते हैं... पुलिस भी साध लेती चुप्पी

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मेडिकल कॉलेज में चलता है जूनियर डॉक्टरों का एकछत्र राज, सीनियर करते हैं सपोर्ट
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जो मार खाता है पुलिस उसे बैठाकर करा देती है समझौता, नहीं होता असर

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। यहां तो हद है! शिकायत पर पिटते हैं... पुलिस भी साध लेती चुप्पी। ऐसे हालात मरीजों को आए दिन झेलने पड़ते हैं। अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा और बेहतरीन डॉक्टरों की मौजूदगी वाला बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज इलाज से ज्यादा मरीज व तीमारदारों की पिटाई को लेकर चर्चा में रहता है।
प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा सरकारी अस्पताल हो, जहां वार्ड और उसके बाहर मरीज या तीमारदार को पीटा जाता हो। इससे भी बड़ी बात यह है कि कॉलेज गेट पर बनी पुलिस चौकी केवल पीड़ितों से समझौता कराने का रोल निभाती है। पुलिस फोर्स न तो अस्पताल में होने वाली मारपीट रोक पाती है और न ही मरीज माफिया का जाल तोड़ पा रही है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस वक्त करीब 1700 मरीजों को भर्ती करने की सुविधा है। इसके अलावा ओपीडी में भी लगभग 3500 मरीज आते हैं। एक ही परिसर में कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, बाल रोग संस्थान और आरएमआरसी के बाद अब ट्रामा सेंटर भी बनने जा रहा है। परिसर और संसाधन के मामले में यह प्रदेश के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में शामिल है।
बीते तीन अगस्त को मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम हाॅल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संस्थान की तुलना एम्स से करते हुए कहा था कि यह गर्व की बात है कि लोग एम्स से अधिक बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर भरोसा करते हैं। लेकिन जूनियर डॉक्टरों का यह व्यवहार लोगों का भरोसा तोड़ रहा है। इस अस्पताल में इलाज की व्यवस्था संभालने वाले जूनियर डॉक्टर अक्सर ही किसी न किसी मरीज को पीटते रहते हैं। पीड़ित अगर पुलिस से शिकायत करते हैं तो केस दर्ज नहीं होता है। ऊपर से इलाज से भी मना कर दिया जाता है।

बीआरडी में हो चुकी हैं मारपीट की ये घटनाएं

13 अगस्त 2024 : बस्ती के भाई-बहन को मेडिसिन वार्ड से लेकर मेन गेट तक जूनियर डॉक्टरों ने दौड़ाकर पीटा। देर शाम समझौता करा दिया गया।
25 मई 2024 : बस्ती से आए मरीज के परिजनों ने हालत पूछ लिया, जिससे नाराज जूनियर डॉक्टरों ने महिला तीमारदार की पिटाई कर दी।
21 अप्रैल 2024 : संतकबीरनगर के बेलौली निवासी रामसेवक त्रिपाठी के इलाज के बारे में पूछने से नाराज डॉक्टरों ने वेंटिलेटर ही बंद कर दिया, जिससे मरीज की मौत का आरोप लगा। पुलिस को तहरीर भी दी गई, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ।
5 अप्रैल 2024 : मेडिकल कॉलेज गेट पर दवा की दुकान में जूनियर डॉक्टरों ने तोड़फोड़ की, 35 डाॅक्टरों पर केस दर्ज हुआ। अभी इस प्रकरण की जांच सीओ कर रहे हैं।
3 फरवरी 2023 : मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में देवरिया के मदनपुर निवासी शैला देवी को देखने आए उनके भतीजे अजय को जूनियर डॉक्टरों ने पीट दिया। पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

29 अक्तूबर 2022 : पिपराइच के घनश्याम राजभर को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा।

4 अगस्त 2022 : सिद्धार्थनगर के युवक की पिटाई की गई।

21 अगस्त 2021 : पिता की पिटाई का वीडियो बनाने पर जूनियर डॉक्टरों ने युवती को पीटा।

25 जुलाई 2019 : मेडिसिन वार्ड नंबर नौ में रामदुलारे को जूनियर डॉक्टरों ने दौड़ाकर पीटा।

12 मई 2019 : मेडिसिन विभाग में इलाज कराने आए आनंद कुमार चौरसिया की मौत हो गई थी। परिजनों ने एक बार जांच करने को कहा तो जूनियर डॉक्टरों ने पीटा।

22 अप्रैल 2019 : मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अंशू की मौत हुई। पूछताछ करने पर परिजनों को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा।

06 दिसंबर 2019 : देवरिया के तीमारदार अजय की पिटाई की गई।

10 दिसंबर 2018 : सर्जरी वार्ड नंबर चार में भर्ती आकांक्षा के पिता कोमल को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा।

12 सितंबर 2018 : मेडिसिन वार्ड में महिला को पीटा गया। वह देवरिया की रहने वाली थीं।

8 नवंबर 2016 : ट्रामा सेंटर में खुशबू के परिजनों को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा।
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अब ऐसा हुआ तो बख्शे नहीं जाएंगे जेआर : प्राचार्य
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा कि अस्पताल आए किसी मरीज के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की इजाजत किसी स्वास्थ्य कर्मी को नहीं है। हमने हर जगह बैनर लगवा दिया है कि इलाज से संबंधित कोई शिकायत सुबह नौ से 10 बजे तक सीधे मुझे बताएं। सभी विभागाध्यक्षों को भी स्पष्ट रूप से बता दिया गया है कि अब अगर किसी ने व्यवस्था बिगाड़ने और संस्थान को बदनाम करने की कोशिश की तो उसके साथ कोई रियायत नहीं होगी। अगर कोई जेआर गलती करता है तो जो भी नियम संगत कार्रवाई है, की जाएगी। कुछ दिन पहले एक मरीज के साथ मारपीट करने के आरोपी जेआर को एक सप्ताह के लिए निलंबित भी किया था। मंगलवार को हुई घटना के बाद भी सभी को अंतिम चेतावनी दी गई है।
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कोट-
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर बार-बार मरीजों से झगड़ा करते हैं, जिससे व्यवस्था बिगड़ रही है। जूनियर डॉक्टरों की काउंसिलिंग कराने के लिए प्राचार्य को पत्र भेजा गया है। अगर इसके बाद भी हालात नहीं बदलते हैं तो विधिक कार्रवाई की जाएगी।
- योगेंद्र सिंह, सीओ-गोरखनाथ

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